By अनन्या मिश्रा | Apr 07, 2026
असम की राजनीति में एक अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। आदिवासी बहुल राज्य झारखंड की प्रमुख राजनीतिक पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम की क्षेत्रीय पार्टी JMM को अपना पूरा समर्थन दिए जाने की घोषणा की है। इस गठबंधन का उद्देश्य असम के आदिवासी और चाय जनजाति समुदायों की लंबे समय से चलने वाली समस्याओं का समाधान करना है। असम के विभिन्न आदिवासी समूहों, समुदायों और संगठनों के सहयोग से गठित जय भारत पार्टी को अब JMM का मजबूत साथ मिला है।
बता दें कि इस सियासी पहल को उन पूर्व आदिवासी उग्रवादी संगठनों के सदस्यों को भी खुला समर्थन मिला है, जोकि अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं। विशेष रूप से साहिल मुंडा, जो पहले एक उग्रवादी संगठन के शीर्ष नेता रह चुके हैं। वह सरूपथार विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव भी लड़ चुके हैं। इस बार उनके नेतृत्व में कई पूर्व सदस्य जय भारत पार्टी और JMM के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पार्टी के नेताओं के मुताबिक इस चुनाव में उतरने का उनका मुख्य उद्देश्य अपने समुदाय की सालों पुरानी समस्याओं का समाधान करता है। साहित मुंडा के मुताबिक यह सिर्फ शुरूआत है और राज्य की करीब 40 विधानसभा सीटों पर चाय जनजाति और आदिवासी समुदाय निर्णायक भूमिका निभाते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यह गठबंधन इन सभी सीटों पर न सिर्फ चुनाव लड़ेगा, बल्कि अपनी भागीदारी को भी सुनिश्चित करेगा। उनका मानना है कि आने वाले समय में जय भारत पार्टी और JMM असम की राजनीति में अहम शक्ति बनकर उभरेंगे।
गठबंधन ने यह स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य लक्ष्य आदिवासी और चाय जनजाति समुदायों को सालों से झेल रहे उपेक्षा और शोषण से मुक्त करता है। विशेष रूप से जनजातीय दर्जा दिलाने के साथ अन्य बुनियादी समस्याओं के समाधान पर जोर दिया जा रहा है।
बता दें कि यह गठबंधन असम की राजनीति में एक नया समीकरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चाय जनजाति समुदाय और आदिवासी, जो लंबे समय सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। अब एक संगठित राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, इस गठबंधन की सक्रियता से आने वाले समय में असम की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जिसमें एक आदिवासी सीएम बनने की संभावनाओं के साथ आदिवासी नेतृत्व की भूमिका अधिक मजबूत हो सकती है।