भारत ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? 51000 करोड़ में नए जहाज खरीदे जाएंगे

By अभिनय आकाश | May 04, 2026

भारत ने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी गूंज सिर्फ दिल्ली या मुंबई तक नहीं बल्कि पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार में सुनाई देने वाली है। ₹51,000 करोड़ का मेगा प्लान, 62 नए जहाज, विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करने का मिशन और सबसे बड़ी बात भारत अब साफ कह चुका है कि हमारे व्यापार, हमारी ऊर्जा सुरक्षा और हमारी सप्लाई चेन किसी दूसरे देश के भरोसे नहीं चलेगी। दोस्तों, यह सिर्फ जहाज खरीदने का मसला नहीं है। यह भारत की संप्रभुता, इकोनॉमिक सिक्योरिटी और ग्लोबल पावर बनने की तैयारी है। तो आज की इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे भारत ने अचानक इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? कौन-कौन से जहाज खरीदे जाएंगे? किन-किन कंपनियों को फायदा होगा?  क्यों यह कदम चीन, यूरोप और दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों के लिए चेतावनी मानी जा रही है। दरअसल, भारत सरकार ने ₹51,383 करोड़ का मेगा टेंडर तैयार किया। जिसके तहत कुल 62 शिपिंग वेसल्स खरीदी या बनाई जाएंगी। इन जहाजों में शामिल होंगे क्रूड ऑयल टैंकर, एलपीजी कैरियर, एलएनजी कैरियर, कंटेनरशिप, बल्क कारगो वेसल्स, ग्रीन टक बोट्स और ड्रेजर्स। 

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भारत अब सिर्फ एक सेक्टर पर नहीं बल्कि पूरे समुद्री इकोसिस्टम पर काम कर रहा है। सबसे बड़ी बात दोस्तों कि 34 जहाजों का टेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है। बाकी जहाजों के लिए जल्द प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस पूरी योजना से भारत की समुद्री क्षमता में लगभग 2.85 मिलियन ग्रॉस टनेज का इजाफा हो जाएगा जो अपने आप में बहुत बड़ा आंकड़ा है। लेकिन सवाल तो उठेगा ही और सवाल है भारत को अचानक यह फैसला क्यों लेना पड़ा? तो इसका सीधा जवाब है दुनिया का बदलता माहौल। पिछले कुछ समय से वेस्ट एशिया में तनाव बढ़ा। रेड सी, हॉर्मज और कई समुद्री रास्तों पर खतरे बढ़े। जहाजों का बीमा महंगा हो गया। फ्रेट कॉस्ट बढ़ गई और दुनिया को समझ में आया कि अगर समुद्री रास्ते रुक जाए तो अर्थव्यवस्था डगमगा जाएगी। भारत ने इसी खतरे को समय रहते पहचान लिया। आज भारत की स्थिति यह है कि भारत का 90% से ज्यादा व्यापार समुद्री रास्ते से होता है। लेकिन जहाजों के मामले में भारत अभी भी बड़ी मात्रा में विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। जहाज किराए पर लिए जाते हैं ग्रीस से, चीन से, सिंगापुर से, जापान से, दक्षिण कोरिया से यानी भारत का व्यापार चलता है। लेकिन जहाज किसी और के और यही निर्भरता अब भारत खत्म करना चाहता है। 

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यह सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं है। सोचिए अगर कल युद्ध और भड़क जाए ईरान और अमेरिका के बीच या फिर किसी देश ने जहाज देना बंद कर दिया या किराया दोगुना कर दिया तो भारत के तेल, गैस, कोयला, उर्वरक, कंटेनर, सप्लाई सब कुछ प्रभावित हो जाएगी। इसलिए भारत ने कहा अब अपने जहाज होंगे, अपनी शर्तें होंगी और अपना कंट्रोल होगा। अब बात करते हैं कौन-कौन कंपनियां इसमें शामिल होगी। सबसे बड़ा रोल रहेगा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का भारत की सरकारी शिपिंग दिग्गज कंपनी।

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