साहित्यिक संसार की खबर सार (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Oct 05, 2020

साहित्य की गर्वीली दीवार पर रचनाकार आजकल ऐसे खुश दिख रहे हैं जैसे रंग बिरंगे गुब्बारे। प्रसिद्द, धनवान, बलिष्ट पर गलती से व्यंग्य लिखना शरीर तुडवाऊ शंकाओं से भरा रहा इसलिए हल्का फुल्का, स्वादिष्ट लिखकर या खिसकाकर वेबिनार में ज्यादा खुश रहने लगे हैं। दूसरों की तारीफ़ करना तो कभी प्रशंसनीय बात रही नहीं अब दुनिया का वजूद खतरे में होते हुए भी सुहाता नहीं दिख रहा। अखबार अब संभल कर रचनाएं प्रयोग कर रहे है, उन्हें यह छापना अच्छा लग रहा है कि फलां हीरोइन आजकल महाअवकाश के दिन कैसे शांति की खेती बाड़ी कर रही है। अगर चेहरे वाली किताब न हो तो कुछ भी पता न चले, हैरानी इस बात की है कि दुनिया में इतना प्लास्टिक होने के बावजूद कई कलम घिसुओं को ट्राफी का सामान नहीं मिला, तभी प्रशंसा खाने की इनकी भूख अभी तक नहीं मिट पाई।

टिप्पणियां दागते हुए वही लेखक जिन्होंने कुछ दिन पहले अपनी लिखी या छपी तीन किताबों का विज्ञापन दिया था अपनी टांग यहां घुसाकर बोले, अडसठ की युवा उम्र में यह सम्मान मिलना जीवन उपलब्धि है। उन्होंने अपने बारे में दोबारा बताया कि चुने हुए रचनाकारों में उनका नाम भी है। अब बधाई की हवाएं ज्यादा चलने लगी और उन्हें भी लगने लगी। साहित्य संसार ज्यादा खुशगवार हो उठा। एक संजीदा टिप्पणीकार ने खबरदार किया कि आप तीनों अच्छे रचनाकार हैं इसमें कोई शक नहीं लेकिन आप के सुदृढ़ कंधों की उंचाई पर बैठकर  कुछ कथित रचनाकार भी श्रेष्ट रचनाकार का तमगा हासिल करने की जुगत में लगे हैं, कृपया इस षड्यंत्र को समझने का प्रयास करें। रचना त्रिमूर्ति को लगने लगा कि यह इशारा उनके अपने विज्ञापन में घुसे लेखक के बारे में रहा होगा। पिछले दिनों वह रचनाकार कम लाइक्स मिलने से नाराज़ होकर, दो महीने का अवकाश घोषित कर फेसबुक सूनी कर गए थे। फिर उन्हें एहसास हुआ कि नाराज़ होकर बंदा अपना ही नुक्सान करता है, जनाब वापिस आ गए और तीन किताबों वाली घोषणा से धमाका कर दिया। 

इसे भी पढ़ें: दो गज़ की दूरी से दूर (व्यंग्य)

अब रचनाकार त्रिमूर्ति को अपना प्रचार तंत्र अधिक सशक्त करना पड़ा, कठोर मेहनत की और बारह समाचार पत्रों में प्रेस नोट भेजा जिसमें से सात ने छापा कि शहर के तीन प्रतिभावान लेखकों का श्रेष्ठ रचनाकारों में शामिल होना कोरोना समय की बड़ी उपलब्धि है। साहित्य की दुनिया में रचनाकारों का सक्रिय रहना उनके स्वस्थ रहने का परिचायक है। फेकन्यूज़ के ज़माने  में यह सुखदायक खबर हो सकती है, लेकिन यह बात भी सौ पैसे सच है कि रचनाकार को जीवित रहने के लिए हाथपांव तो मारने ही पड़ेंगे। 

- संतोष उत्सुक

प्रमुख खबरें

Donald Trump की Iran को दो टूक, Global Oil Supply में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं होगी

Online Fraud पर RBI का सख्त शिकंजा, UPI यूजर्स के लिए आए ये 5 बड़े Security Rules

Gold Price Crash: मार्च में 10 साल की सबसे बड़ी गिरावट, 12% सस्ता हुआ सोना, जानें वजह

PSL 2024 में Babar Azam का जलवा, T20 Record बनाकर Virat Kohli को भी पछाड़ा, बने Fastest 12000 रन