अगला ईरानी सुप्रीम लीडर तो और भी खतरनाक है, इधर चीन ने भी चुपके से कर दिया डबल गेम, पलट दिया पूरा खेल

By अभिनय आकाश | Mar 04, 2026

ईरान के नए सुप्रीम कमांडर का ऐलान कर दिया गया है। खामनई की मौत के बाद अब कमान इनके हाथों में है। अब इजराइल और अमेरिका से किस तरीके से निपटना है इसकी रणनीति अब यह बनाते हुए नजर आएंगे। ईरान की विशेषज्ञ सभा (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) ने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है।  ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चयन शक्तिशाली ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर के दबाव में किया गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कथित तौर पर कट्टरपंथी गुटों को एकजुट कर मोजतबा के पक्ष में दबाव बनाया, क्योंकि वे उनके पिता के करीबी सहयोगी रहे हैं और सुरक्षा तंत्र में मजबूत पकड़ रखते हैं।

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अमेरिका युद्ध जो चल रहा है इसमें चीन क्यों चुप है?

चीन के विदेश मंत्री वांगी की तरफ से बयान सामने आया। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक्षी से फोन पर बात कर तेहरान का सपोर्ट करने का ऐलान किया है। वांग ने कहा कि चीन ईरान की सोवनिटी, सिक्योरिटी और जो वहां की इंटीग्रिटी है और नेशनल डिग्निटी की रक्षा करने और उसके कानूनी अधिकारों और हितों को बनाए रखने में उसका सपोर्ट करता है। यहां पर ये सवाल उठ रहा है कि आखिर चीन ने अमेरिका और इजराइल के जो हमले हैं उसके लिए कोई कड़ी टिप्पणी क्यों नहीं की? चीन के इस रुख के पीछे की वजह क्या है? क्या चीन नहीं चाहता कि ईरान परमाणु शक्ति बने? इसके पीछे आखिर चीन की चुप्पी के पीछे बड़ी वजह क्या है ? यह  फैक्ट है कि ईरान को ताकत देने में चीन का बड़ा हाथ है। जो आज  ईरान की मिसाइल देख रहे हैं, ड्रोन देख रहे हैं। बिल्कुल और चीन उसका अच्छा मित्र भी कहा जाता है। तभी ये सवाल उठ रहा है कि क्या यहां पर चीन डबल गेम खेलता हुआ नजर आ रहा है। साथ ही चीन ने ईरान के अंदर 400 बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट की घोषणा भी की है। किया भी है। लेकिन फिर भी साइलेंट है। इसकी वजह ये है कि ईरान ने गलती की। ईरान ने गलती क्या की कि ईरान ने ताबड़तोड़ हमले पूरे के पूरे मिडिल ईस्ट में करना स्टार्ट कर दिया। चीन सऊदी के साथ भी अच्छे रिलेशन चाहता है। कतर के साथ भी यूएई के साथ भी और कई कंट्रीज के साथ बेटर रिलेशन चाहता है। वो नहीं चाहता कि ईरान की शर्त पर वो सब देशों से अपने रिलेशन खराब कर ले। 

चीन कभी भी ओपनली अमेरिका के सामने आना नहीं चाहता है। चीन अभी और ज्यादा अपनी ताकत को एनहांस करना चाहता है। चीन ये सोचता है कि वेट एंड वॉच किया जाए। अमेरिका को खुद अपनी ताकत को खर्च कर ले, दिया जाए। जहां चाहे लड़ जाए।  चीन सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी को ले चलता है।

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