By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 29, 2022
पीठ ने कहा, “राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा पर्याप्त कार्रवाई के अभाव में समस्या अभी भी बनी हुई है, जो मिशन मोड में उपचारात्मक कदम उठाए जाने की मांग करती है, जिसमें इस तरह की निरंतर विफलताओं के लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना शामिल है।” अपने हालिया आदेश में पीठ ने कहा, “उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को चर्म शोधन इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर वास्तविक रूप में लगाम लगाने के लिए उपचारात्मक उपाय करने की जरूरत है। इसमें उचित दिशा-निर्देश जारी करना, ड्रम या पैडल को सील करना, उत्पादन क्षमता में कटौती करना और अनुपालन लक्ष्य की प्राप्ति तक चर्म शोधन इकाइयों को बंद करना शामिल है।”