गंगा में प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से मिशन मोड में कदम उठाने को कहा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 29, 2022

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को कानपुर जिले में चर्म शोधन इकाइयों से क्रोमियम-दूषित अपशिष्ट को उचित शोधन के बिना गंगा नदी में बहाए जाने के संबंध में ‘तेजी से’ कार्रवाई करने और एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि मामले में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन नालों और एक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के माध्यम से गंगा में अशोधित अपशिष्ट का प्रवाह जारी है। 

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पीठ ने कहा, “राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा पर्याप्त कार्रवाई के अभाव में समस्या अभी भी बनी हुई है, जो मिशन मोड में उपचारात्मक कदम उठाए जाने की मांग करती है, जिसमें इस तरह की निरंतर विफलताओं के लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना शामिल है।” अपने हालिया आदेश में पीठ ने कहा, “उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को चर्म शोधन इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर वास्तविक रूप में लगाम लगाने के लिए उपचारात्मक उपाय करने की जरूरत है। इसमें उचित दिशा-निर्देश जारी करना, ड्रम या पैडल को सील करना, उत्पादन क्षमता में कटौती करना और अनुपालन लक्ष्य की प्राप्ति तक चर्म शोधन इकाइयों को बंद करना शामिल है।” 

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