By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 03, 2026
अहमदाबाद, दो सितंबर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बुधवार को गुजरात सरकार को निर्देश दिया कि कथित जालसाजी के मामले में गिरफ्तारी के बाद सार्वजनिक रूप से घुमाई गई महिला को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए 7.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। पायल गोटी को 2024 के अमरेली फर्जी पत्र मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।
सेठ ने कहा, राज्य सरकार को पायल-बेन को मुआवज़े के तौर पर 7.5 लाख रुपये देने का आदेश दिया गया है। गोटी और तीन अन्य लोगों को दिसंबर 2024 में अमरेली तालुका पंचायत अध्यक्ष के नाम कथित तौर पर जारी किए गए फर्जी पत्र को तैयार करने और प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस पत्र के जरिये भाजपा विधायक एवं मंत्री कौशिक वेकारिया को बदनाम करने का प्रयास किया गया था।
कंप्यूटर ऑपरेटर गोटी पर आरोप था कि उन्होंने दस्तावेज को टाइप करने, प्रिंट करने और पीडीएफ में बदलने में मदद की थी, जिसके बाद इसे सोशल मीडिया पर साझा किया गया। आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, गलत सूचना फैलाने और मानहानि से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। महिला का आरोप है कि उसे आधी रात के आस-पास हिरासत में लिया गया था, जबकि प्राथमिकी बाद में सुबह करीब 5:30 बजे दर्ज की गई।
उसने दावा किया कि उसे स्थानीय अपराध शाखा के कार्यालय में रखा गया था। गोटी ने दावा किया कि इसके अलावा, अमरेली के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने एक संवादादाता सम्मेलन में उनकी पहचान उजागर की और अगले दिन घटना के नाटकीय रुपांतरण के नाम पर उन्हें और अन्य आरोपियों को अमरेली शहर में घुमाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई।
गोटी को जनवरी 2025 में जमानत मिल गई थी।