NIA कोर्ट ने PFI के 4 सदस्यों को शशिकुमार मर्डर केस में सुनाई उम्रकैद

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 25, 2026

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में 2016 में हिंदू मुन्नानी नेता सी. शशिकुमार की हत्या के मामले में प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के चार सक्रिय सदस्यों को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में पीएफआई पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद संगठन के सदस्यों को सजा सुनाए जाने का एनआईए का यह पहला मामला है। एनआईए द्वारा जारी बयान के अनुसार, चेन्नई के पूनामल्ली स्थित विशेष अदालत ने सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

शुरुआत में मामले की जांच कोयंबटूर के थुडियालुर थाने और उसके बाद तमिलनाडु अपराध शाखा-अपराध अन्वेषण विभाग (सीबी-सीआईडी) ने की थी। इसके बाद केंद्र सरकार के आदेश पर जनवरी 2018 में मामला एनआईए को सौंप दिया गया। एनआईए की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीएफआई के सक्रिय सदस्य रहते हुए आपराधिक साजिश रची और हत्या को अंजाम दिया।

विस्तृत जांच के बाद एनआईए ने पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और दो पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। मामले की सुनवाई 2019 में शुरू हुई थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 75 गवाहों और बचाव पक्ष के दो गवाहों से सवाल-जवाब किए गए।

अदालत ने चारों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक साजिश) और 153-ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं 16, 18 और 20 के तहत दोषी ठहराया। वहीं, विशेष अदालत ने एक सह-आरोपी अबू उर्फ सैयद अबुताहिर को बरी कर दिया। एनआईए ने कहा कि वह फैसले की समीक्षा कर रही है और बरी किए गए आरोपी के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने के सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।

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