Suryakant Tripathi Birth Anniversary: Hindi Literature के महाप्राण 'निराला', जिनके संघर्षों की गूंज आज भी कविताओं में है ज़िंदा

By अनन्या मिश्रा | Feb 21, 2026

हिंदी साहित्य और छायावाद के अमिट स्तंभ महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म 21 फरवरी को हुआ था। उन्होंने उपन्यास, कहानियां और निबंध लिखे, लेकिन वह अपनी कविताओं की वजह से सबसे ज्यादा चर्चित रहे। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उनका यह संघर्ष उनकी कविताओं में भी झलकता है। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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काव्य संग्रह

सूर्यकांत त्रिपाठी के प्रसिद्ध काव्य संग्रह- गीतिका, तुलसीदास, बेला, नये पत्ते, सांध्य काकली, अपरा, अनामिका, परिमल, कुकरमुत्ता, अणिमा, अर्चना, अराधना, गीत कुंज आदि हैं।

उपन्यास

वहीं उन्होंने 'अलका', 'कुल्ली भाट', 'प्रभावती', 'अलका', 'निरुपमा' और 'अप्सरा' जैसे उपन्यास लिखे हैं।

इस कवियत्री को मानते थे बहन

निराला ने हिंदी साहित्य को मजबूत बनाने का काम किया था। साथ ही उन्होंने पूरे मानव समाज को भी सार्थक बनाने का काम किया था। वह हिंदी के बड़े कवि और साहित्यकार थे। उनके पास रॉयलटी का पैसा भी नहीं रहता था। एक बाद कवियत्री महादेवी वर्मा ने निराला से कहा कि उनका सारा रुपया वह रखेंगी। जिससे कि कुछ रुपया बच सके और भविष्य में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के काम आ सके। महादेवी उनके लिए छोटी बहन थीं। इसलिए वह अपना सारा पैसा महादेवी वर्मा को दे देते थे और जरूरत पड़ने पर उनसे मांगते थे।

मृत्यु

अपने अंतिम समय में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला प्रयागराज के दारागंज मोहल्ले में रहते थे। वहीं स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका 15 अक्तूबर 1961 को निधन हो गया था।

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