By Ankit Jaiswal | Oct 19, 2026
भारतीय शेयर बाजार में पिछले 2 साल से निवेशकों को खास फायदा नहीं मिला है। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स इस दौरान सकारात्मक रिटर्न देने में नाकाम रहे हैं। इस स्थिति पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बाजार में आसानी से पैसा लगाने और निकालने की सुविधा के कारण निवेशक अब शेयरों से बाहर निकलने का फैसला भी तेजी से ले रहे हैं। उनके मुताबिक, बाजार में नकदी की उपलब्धता जहां कारोबार को सहारा देती है, वहीं इससे बिकवाली भी आसान हो जाती है।
भारतीय शेयर बाजार पर इस साल भी दबाव बना हुआ है। जनवरी से अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। व्यापार को लेकर अनिश्चितता और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन इसका असर शेयर बाजार में निवेशकों के भरोसे पर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2024 से विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 63.6 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। इससे पहले के 9 वर्षों में उन्होंने लगभग 63.5 अरब डॉलर का निवेश किया था। इस तरह पिछले वर्षों में आया विदेशी पैसा हालिया बिकवाली के कारण लगभग पूरी तरह बाहर निकल गया है। राष्ट्रीय प्रतिभूति डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2015 से विदेशी निवेश का कुल शुद्ध आंकड़ा अब लगभग शून्य के आसपास पहुंच गया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली 2026 में और तेज हुई है। उन्होंने इस साल भारतीय शेयरों से 32.8 अरब डॉलर निकाले हैं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 18.9 अरब डॉलर था। मार्च में सबसे ज्यादा 12.7 अरब डॉलर की निकासी हुई। इसके बाद अप्रैल में 6.5 अरब डॉलर और जून में 5.2 अरब डॉलर निकाले गए।
इस बिकवाली के पीछे अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ता रिटर्न, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भारतीय बाजार से मिलने वाले कम रिटर्न जैसे कारण बताए जा रहे हैं। वहीं, भारत में घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को सहारा दे रहा है। भारतीय म्यूचुअल फंड संघ के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2021 से शेयर आधारित म्यूचुअल फंड में हर महीने शुद्ध निवेश आया है। इससे बाजार में नकदी बनी हुई है और पुराने निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका भी मिल रहा है।
गौरतलब है कि एआई से जुड़ी कंपनियों में बढ़ती दिलचस्पी के कारण ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों को विदेशी निवेश का फायदा मिला है। गोल्डमैन सैक्स की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत के प्रमुख शेयर इंडेक्स में ताइवान की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया की 22 प्रतिशत हो गई है। वहीं, भारत की हिस्सेदारी कुछ साल पहले के 19 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।
सीतारमण ने कहा कि अमेरिका और एआई से जुड़े क्षेत्रों की ओर पूंजी का जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि दुनिया में एआई से जुड़ा निवेश बुलबुला फूटता है, तो भारत पर इसका असर सीमित रह सकता है, क्योंकि यहां दूसरे देशों की तरह बड़े पैमाने पर ऐसा निवेश नहीं आया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत एडवांस तकनीक के मामले में अब पीछे नहीं है और देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में निवेश किया जा रहा है। ऐसे में बाजार की आगे की चाल विदेशी पूंजी, घरेलू निवेश और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर रहने वाली है।