By अंकित सिंह | Jul 23, 2024
केंद्र में मोदी 3.0 की सरकार बनने के बाद आज पूर्ण बजट पेश किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह बजट पेश किया। इस बजट पर पूरे देश की निगाह थी। बजट के बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा में भी आज कुछ खास कामकाज नहीं हो सका। वहां भी वित्त मंत्री के बजट को सदन की पटल पर रखने के बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। तंजानिया संयुक्त गणराज्य की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष और अंतर संसदीय संघ (आईपीयू) की प्रमुख तूलिया एक्सन ने मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही देखी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण को सुना। एक्सन तंजानिया के शिष्टमंडल के साथ सदन की विशेष दीर्घा में बैठी थीं। उनकी सदन में उपस्थिति की जानकारी देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि एक्सन सम्मानित अतिथि के रूप में भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
वित्त मंत्री के बजट भाषण के दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा समेत केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव, द्रमुक के टी आर बालू और राकांपा (एसपी) की सुप्रिया सुले समेत प्रमुख विपक्षी नेता भी बजट भाषण के दौरान सदन में उपस्थित रहे।
राज्यसभा में मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के लिए बजट की प्रति और संबंधित दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जिसके बाद जिसके बाद उच्च सदन की कार्यवाही दोपहर एक बज कर 55 मिनट पर बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। उच्च सदन की बैठक आज लोकसभा में आम बजट 2024-25 पेश किए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक घंटे बाद, अपराह्न एक बज कर 30 मिनट पर प्रारंभ हुई। आसन की अनुमति से वित्त मंत्री सीतारमण ने 2024-25 के लिए बजट की प्रति, राजकोषीय नीति विवरण 2024-25 तथा जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के लिए बजट 2024-25 की प्रति सदन के पटल पर रखी। वित्त मंत्री ने जब इन दस्तावेजों को सदन के पटल पर रखा तो विपक्ष के कई सदस्य नारेबाजी और हंगामा कर रहे थे। इसके बाद अपराह्न एक बज कर करीब 55 मिनट पर सभापति ने बैठक को कल पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले सभापति ने 22 जुलाई को कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह द्वारा नियम 238 के तहत व्यवस्था का प्रश्न उठाए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब सिंह व्यवस्था का प्रश्न उठा रहे थे तब उनकी ही पार्टी के सदस्य जयराम रमेश अपने स्थान पर बैठ कर कुछ कह रहे थे। सभापति ने कहा कि रमेश ने जो कहा वह नियमों के अनुकूल नहीं होने की वजह से, कार्यवाही से निकाल दिया गया। सभापति ने इस बात पर भी नाखुशी जताई कि रमेश उनकी अनुमति लिए बिना ही बोल रहे थे। धनखड़ ने कहा कि लंबे संसदीय अनुभव और मंत्री पद के अनुभव के बाद सदस्य का इस तरह का आचरण उचित नहीं है।