By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 13, 2026
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि पिछले डेढ़ साल में रुपये के मूल्य में खासी गिरावट आई है और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) घरेलू मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने के प्रयास जारी रखेगा। सीतारमण ने यहां ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026 कार्यक्रम में कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर पहुंच गया है और आरबीआई अपने नियामकीय अधिकारों का इस्तेमाल कर घरेलू मुद्रा में स्थिरता बनाए रखने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, आरबीआई रुपये का मूल्य तय करने की कोशिश नहीं कर रहा है, बल्कि उसमें उतार-चढ़ाव रोकने का प्रयास कर रहा है।
रुपये में गिरावट थामने के लिए रिजर्व बैंक ने सप्ताहांत में कई उपायों की घोषणा की थी। केंद्रीय बैंक ने पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू करने की घोषणा की, जिससे डॉलर की उनकी मांग हाजिर बाजार से हट सकेगी। इसके अलावा, रुपये से जुड़ी सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम भी कड़े किए गए।
आरबीआई ने बैंकों से दो लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का आरक्षित प्रावधान करने को भी कहा है। सीतारमण ने कहा कि आरबीआई के हाल के उपायों से रुपये को समर्थन मिला है। सोमवार को रुपये के मूल्य में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
मंगलवार को भी शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत होकर 94.96 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे भरोसा है कि आरबीआई रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आगे भी कदम उठाएगा।’’ उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। वित्त मंत्री ने कहा कि रुपये में उतार-चढ़ाव की प्रमुख वजह बाहरी चुनौतियां हैं, जबकि सरकार देश के भीतर व्यापक आर्थिक बुनियादी कारकों को मजबूत बनाए रखने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन निवेशकों के लिए चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। हालांकि, डॉलर के मुकाबले रुपये की घट-बढ़ चुनौती बनी हुई है और सरकार इस पर ध्यान देगी।