By नीरज कुमार दुबे | Mar 31, 2026
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे ने न केवल विपक्ष बल्कि भाजपा के भीतर भी मतभेद उजागर कर दिए हैं। पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब निशिकांत दुबे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बीजू पटनायक को जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के बीच कड़ी बताया। इस बयान को बीजू जनता दल ने बेहद आपत्तिजनक और असत्य करार दिया। पार्टी का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी से बीजू पटनायक की देशभक्ति पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि भाजपा के ही वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने खुले तौर पर निशिकांत दुबे के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजू पटनायक केवल ओडिशा ही नहीं बल्कि पूरे देश के महान नेता थे और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है। पांडा ने अपने बयान में बीजू पटनायक को आधुनिक भारत के सबसे बड़े देशभक्तों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में देश की सेवा कई भूमिकाओं में की, चाहे वह पायलट के रूप में हो, उद्योगपति के रूप में या फिर राजनीतिक नेता के रूप में।
हम आपको यह भी बता दें कि इस मामले को लेकर संसद में भी हंगामा देखने को मिला। बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने सोमवार को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए बयान पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया और विरोध स्वरूप पार्टी ने सदन से वाकआउट किया। सस्मित पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि निशिकांत दुबे ने बीजू पटनायक को सीआईए एजेंट तक कह दिया, जो कि एक गंभीर और अपमानजनक आरोप है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने एक संसदीय समिति से भी इस्तीफा दे दिया।
उधर, ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने भी इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने निशिकांत दुबे के बयान को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसा बयान देने वाले को मानसिक चिकित्सक की जरूरत है। नवीन पटनायक ने यह भी याद दिलाया कि चीन युद्ध के समय जवाहरलाल नेहरू ने बीजू पटनायक को दिल्ली में अपने पास कार्यालय दिया था ताकि वह रणनीतिक मामलों में सहयोग कर सकें। इससे उनकी भूमिका और देश के प्रति योगदान साफ होता है।
दूसरी ओर, विवाद बढ़ने के बाद निशिकांत दुबे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य बीजू पटनायक का अपमान करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह केवल नेहरू गांधी परिवार के कार्यों पर सवाल उठा रहे थे और उसी संदर्भ में उन्होंने बात कही थी। निशिकांत दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा और जनसंघ हमेशा बीजू पटनायक का सम्मान करते रहे हैं, खासकर उस समय जब कांग्रेस ने उनके साथ अन्याय किया था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी को उनकी बात से ठेस पहुंची है तो वह अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए तैयार हैं।
हम आपको बता दें कि बीजू पटनायक भारतीय राजनीति के ऐसे नेता थे जिनकी पहचान केवल एक राज्य तक सीमित नहीं थी। उन्होंने इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन में मदद की, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया और ओडिशा के विकास में अहम भूमिका निभाई। उनकी छवि एक साहसी और राष्ट्रवादी नेता की रही है। यही कारण है कि उनके खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी पर व्यापक प्रतिक्रिया सामने आती है।
बहरहाल, यह पूरा विवाद भारतीय राजनीति में बयानबाजी की सीमा और जिम्मेदारी को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जहां एक ओर राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। इस मुद्दे ने यह भी दिखा दिया कि किसी भी बयान का असर केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पार्टी के भीतर भी मतभेद पैदा कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या इससे राजनीतिक संवाद की शैली में कोई बदलाव आता है। फिलहाल तो दिल्ली से लेकर भुवनेश्वर तक का सियासी माहौल गर्माया हुआ है।