By रेनू तिवारी | Jun 18, 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में हाल ही में हुए वैश्विक घटनाक्रमों ने भारत के लिए अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की घंटी बजा दी है। नीति आयोग के सदस्य अभय करंदीकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा अपने नवीनतम एआई मॉडलों को 'ऑफलाइन' करने का फैसला यह साफ दिखाता है कि भारत को अब एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और हार्डवेयर के विकास में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना होगा।
करंदीकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ स्थानीय एआई अवसंरचना और हार्डवेयर के विकास में हम शायद पीछे हैं... एंथ्रोपिक का यह फैसला इस बात को और मजबूत करता है कि भारत को प्रौद्योगिकी विकास में आत्मनिर्भर बनना होगा।’’ यह निर्यात नियंत्रण अमेरिकी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य उन्नत एआई मॉडलों तक पहुंच को सीमित करना है।
एंथ्रोपिक ने पिछले सप्ताह ‘फेबल’ का एक सीमित संस्करण जारी किया था, जो उसके अधिक उन्नत मॉडल ‘माइथोस’ का हल्का संस्करण है। साइबर सुरक्षा चिंताओं के कारण ‘माइथोस’ तक पहुंच को कंपनी ने काफी सीमित रखा है। नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि भारत को स्थानीय एआई अवसंरचना और हार्डवेयर के विकास के लिए और प्रयास करने होंगे, क्योंकि ‘‘ हमारे पास सेमीकंडक्टर चिप या प्लेटफॉर्म नहीं हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत बड़े पैमाने पर एआई अवसंरचना लागू करने की क्षमता है। करंदीकर ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित अनुप्रयोग विकसित कर रही है। उन्होंने साथ ही बताया कि आयोग नागरिक-केंद्रित सेवाओं में एआई के उपयोग के लिए नए तरीके तलाश रहा है और भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित करने में बढ़त बनाई है।
नीति आयोग के सदस्य ने कहा कि ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत कम से कम 12 स्टार्टअप को समर्थन दिया गया है, जो मूलभूत एआई मॉडल विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ पिछले एक वर्ष में एआई मिशन ने कई कार्य किए हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी की तेज रफ्तार को देखते हुए और प्रयास करने की जरूरत है।
News Source - PTI Information ‘पीटीआई-भाषा’