By अंकित सिंह | May 30, 2022
केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह जुलाई में राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं। जदयू ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला लिया है। इसका मतलब साफ है कि आरसीपी सिंह को अब केंद्रीय मंत्री पद से भी हटना होगा। इसे आरसीपी सिंह के कद में काफी बड़ा गिरावट माना जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह को जो करीब से जानते होंगे, उनके लिए यह किसी झटके से कम नहीं है। हालांकि पिछले कई दिनों से इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार जदयू आरसीपी सिंह को राज्यसभा भेजने के मूड में नहीं है। आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते थे। जब नीतीश कुमार रेल मंत्री थे तब आरसीपी सिंह के साथ उनके निकटता सामने आई थी। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह भी बिहार गए।
हालांकि दोनों नेताओं के बीच रिश्तो में खटास की शुरुआत आरसीपी सिंह के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के साथ ही शुरू हो गई। खुद को दिल्ली की सियासत में आरसीपी सिंह स्थापित करने लगे। जैसे ही आरसीपी सिंह ने मोदी कैबिनेट में एंट्री मारी, उन पर कई तरह के आरोप भी लग गए। पार्टी के कुछ नेताओं का यह भी कहना था कि अपने मंत्री पद के लिए आरसीपी सिंह ने भाजपा से समझौता कर लिया है। यही कारण था कि पार्टी अध्यक्ष के पद से मंत्री बनने के साथ ही आरसीपी सिंह को हटना पड़ा। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि कहीं ना कहीं नीतीश कुमार और उनके रिश्ते अबे पहले की तरह सामान्य नहीं रहे।
पहले इन नेताओं को किया है साइट
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब नीतीश कुमार ने दिल्ली में जिन नेताओं का कद बढ़ा, उन्हें साइट करने की शुरुआत की है। इससे पहले भी नीतीश कुमार ने कई नेताओं को कमजोर किया है। इसमें खुद नीतीश कुमार के गुरु जॉर्ज फर्नांडिस और शरद यादव तक शामिल हैं। दिग्विजय सिंह, उपेंद्र कुशवाहा, अरुण कुमार, अली अनवर, जीतन राम मांझी जैसे बड़े नेताओं को नीतीश कुमार ठिकाने लगा चुके हैं। हालांकि यह बात भी सच है कि यह सभी नेता नीतीश कुमार को बनाने और जदयू को बिहार में स्थापित करने में पूरी ताकत लगाई थी। नीतीश कुमार को बनाने वाले जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और दिग्विजय सिंह को भी एक समय पार्टी के टिकट के लिए तरसना पड़ा था।