By अभिनय आकाश | Oct 13, 2026
स्टेट ऑफ होर्मुज के मुहाने पर महाशक्तियों की कूटनीति पूरी तरह फ्लॉप हो चुकी है और अमेरिका के हर एक प्रस्ताव को तेहरान के बारूदी तेवरों ने सीधे कचरे के डिब्बे में फेंक दिया। दुनिया भर में तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की सप्लाई का 20% हिस्सा नियंत्रित करने वाला स्टेट ऑफ़ हॉर्मोज अब किसी भी बातचीत या कूटनीति से खुलने वाला नहीं दिख रहा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसीन रिजाई ने व्हाइट हाउस को सीधा और दो टुक जवाब देते हुए ऐलान किया कि वाशिंगटन की आधी अधूरी शर्तें तेहरान को कतई मंजूर नहीं। ईरान ने अमेरिका के सामने साफ सुथरी सात शर्तें रखी थी। क़तर के रास्ते कूटनिक संदेशों का आदान-प्रदान तो हुआ। अमेरिका ने क़तर के जरिए जवाब भी भेजा लेकिन रजाई के मुताबिक अमेरिका ने कुछ शर्तें तो मानी मगर मुख्य मुद्दों पर चुप्पी साध ली।
फरवरी के आखिर में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से होर्मुज का या मौत का दरिया पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का गला घोट रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम सरेंडर कर देने चाहिए। लेकिन तेहरान ने भी साफ किया है कि जब तक अमेरिका अपनी पाबंदियां नहीं हटाएगा सेंशंस को नहीं रिमूव करेगा सात शर्तें पूरी नहीं करता तब तक होरमज को बारूदी ताला लगाकर रखा जाएगा। माने उसे खोला नहीं जाएगा। फिर चाहे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम आसमान छू ले या फिर दुनिया में हाहाकार मच जाए। एक्सपोर्ट कहते हैं कि ईरान झुकने वालों में से नहीं दिख रहा। अमेरिका भले खुद न खुद सरेंडर कर दे लेकिन ईरान जिस हिसाब से इस वक्त सीना तान कर खड़ा है उससे उसका खेमा मौजूद है। यहां पर अमेरिकी खेमा बेहद बुरी तरीके से उलझता हुआ नजर आ रहा है।