By अभिनय आकाश | Jul 08, 2026
भारत अपने करीबी देशों के साथ मिलकर अपने देश की बेहतरी के लिए तो तमाम तरह के कदम उठा ही रहा है। इसके साथ एक और काम हो रहा है। वो काम यह है कि चाइना को चेक एंड बैलेंस में रखा जाए। इसके लिए प्रेशर पॉलिटिक्स भी बहुत जरूरी हो जाती है। इसके लिए स्ट्रेटेजिक फॉरेशन, स्ट्रेटेजिक रिश्ते उन देशों के साथ जरूरी हो जाते हैं जो चीन के पड़ोसी हैं जिनको चीन से खतरा है। और यही वजह है कि भारत और इंडोनेशिया का कोलबोरेशन चाइना के माथे पर पसीना लाने वाला है। चीन के सामने कि तुम्हारे विस्तारवाद की नीति पर भारत के विकासवाद की राजनीति जो है वो भारी पड़ेगी। इस बात को भारत के प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के संसद में कहा है तो यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। भारत दुनिया का वो देश है जो विस्तारवाद नहीं विकासवाद की नीति पर चलता है और इसलिए हम भारत में कहते हैं सबका साथ सबका विकास टूगेदर विद ऑल डेवलप मेंट फॉर ऑल आज मैं यही मंत्र यही भावना लेकर इंडोनेशिया के आप सभी सांसद सदस्यों के बीच आया हूं। ऑनरेबल मेंबर्स हमारी राजधानियां भले ही हजारों किलोमीटर दूर हो लेकिन समुद्र में हमारे बीच केवल 150 किलोमीटर की ही दूरी है। दूसरे देशों में समुद्र भले ही सीमाओं और दूरियों का कारण रहा हो लेकिन भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र दूरी का प्रतीक नहीं रहा। समुद्र हमारे बीच एक सेतु है। इंडोनेशिया में इस बात को कहना बहुत अहम इसलिए भी है क्योंकि चीन साउथ चाइना सी में जो कर रहा है अलग-अलग क्षेत्रों में जो कर रहा है वो कई देशों के लिए परेशानियां खड़ी करता है। ऐसे में इंडोनेशिया एक तरफ जहां भारत से पहले ब्रह्मोस उसके बाद अब अस्त्र लेने की बात हो चुकी है, डील हो चुकी है तो दूसरी तरफ अपनी स्ट्रेटेजिक नाकेबंदी को मजबूत कर रहा है जिससे चाइना की दवाई की जा सके और इसके लिए स्टेट ऑफ मलक्का के पास एक अभूतपूर्व प्रोजेक्ट को मंजूरी भी दे दी गई है।
सवांग पोर्ट मलक्का स्टेट के मुहाने पर है। भारत के लिए इसका महत्व अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक है। भारत का पूर्वी एशिया जैसे चीन, जापान, दक्षिण कोरिया के साथ हो रहे होने वाला बड़ा हिस्सा जो है इसी मार्ग से गुजरता है। भारत के पेट्रोलियम उत्पादों, कोयले, मशीनरी कंटेनर व्यापार के लिए ये समुद्री जीवन रेखा की तरह है। ईएक्ट ईस्ट एक्ट जो पॉलिसी है एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत की उसके तहत दक्षिण पूर्वी एशिया से संपर्क मजबूत करने में इसकी एक अहम भूमिका है। वैश्विक स्तर पर स्टेट स्ट्रेट जो है वो ऊर्जापूर्ति की प्रमुख लाइन में से गिना जाता है। पश्चिम एशिया से निकलने वाला कच्चा तेल गैस बड़ी मात्रा में इसी रास्ते से पूर्वी एशियाई देशों तक पहुंचता है। स्टेट ऑफ मरक्का से बताया जाता है कि हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर यानी कि 2800 अरब डॉलर का माल हर वर्ष गुजरता है।