By अभिनय आकाश | Jan 01, 2026
पूरी दुनिया नए साल का जश्न मना रही है। सब इस साल में शांति और खुशियों की कामना कर रहे हैं। लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग ने एक बड़ी चेतावनी दे दी है। लाल झंडे के साए में चीन की दीवार के सामने बैठकर शी जिंपिंग बोले ताइवान का चीन के साथ पुनः एकीकरण अपरिहार्य है। इसे कोई रोक ही नहीं सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ताइवान के बेहद करीब चीन ने रॉकेट, फाइटर जेट और जंगी जहाजों के साथ अब तक का सबसे आक्रामक युद्धाभ्यास किया है। तो सवाल बड़ा है क्या 2026 में एशिया एक और जंग की तरफ बढ़ रहा है? ताइवान के चारों ओर उड़ते फाइटर जेट, समंदर में तैनात युद्धपोत और आसमान से दागे गए रॉकेट। चीन ने इस मिलिट्री ड्रिल का नाम दिया है जस्टिस मिशन 2025 यानी न्याय का मिशन। बीजिंग का दावा है ताइवान उसका आंतरिक मामला है। लेकिन ताइवान कहता है हम एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश हैं।
नववर्ष की पूर्व संध्या पर बुधवार शाम सरकारी मीडिया पर प्रसारित संबोधन में शी ने सैन्य प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष अन्वेषण समेत प्रमुख क्षेत्रों में हुई प्रगति की प्रशंसा की। भाषण के दौरान स्क्रीन पर कुंग फू करते इंसान जैसे रोबोट से लेकर नयी जलविद्युत परियोजनाओं तक की झलकियां दिखाई गईं। शी ने कहा, “हमने नवाचार के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले विकास को गति देने का प्रयास किया।’ उन्होंने पिछले पांच वर्षों में आर्थिक मोर्चे पर देश की प्रगति में योगदान देने के लिए चीनी जनता का आभार जताया। शी ने ताइवान के चीन में विलय करने संबंधी रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि ताइवान और चीन में रहने वाले लोगों का खून का रिश्ता है। ताइवान एक स्वशासित लोकतंत्र है जिसे चीन अपना हिस्सा मानता है।
शी जिंपिंग ने ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांध का भी जिक्र किया। यह प्रोजेक्ट भारत और बांग्लादेश के लिए चिंता की वजह है। पानी, पर्यावरण और सुरक्षा तीनों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल गोलियां नहीं चली है लेकिन संदेश साफ है। ताइवान के आसमान में लड़ाकू विमान है और दुनिया की सासे अटकी हुई है। अब देखना यह है कि 2026 क्या यह सिर्फ चेतावनी है या आने वाले तूफान का ट्रेलर है।