नो पेंशन...ऑन्ली डिप्रेशन (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | May 26, 2023

आज जिसे देखो उस पर डिप्रेशन का भूत सवार है। आज हर घर में कोई न कोई डिप्रेशन का शिकार मिल जाएगा। इस डिप्रेशन से अनभिज्ञ हमारे पड़ोसी गोबर गणेश ने सबकी देखा-देखी इंजीनियरिंग में भर्ती ले ली। गिरते-पड़ते जैसे-तैसे बड़ी मुश्किल से पास हुए। रजिस्टर में उनका नाम जो भी हो फैकल्टी तो उन्हें ‘बैकलॉग कुमार’ कहकर पुकारते थे। नाम के माफिक बैकलॉग रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पढ़ाई पूरी करने के बाद लगे नौकरी खोजने। नौकरी थी कि आबादी की बढ़ती संख्या के अनुरूप एक अनार लाख बीमार कहावत को चरितार्थ कर रही थी। सो उन्हें नौकरी मिलने से रही। नौकरी का इरादा छोड़ व्यापार करने की ठानी। व्यापार करना इतना आसान काम थोड़े न था। लागत लगती है लागत! जैसे-तैसे चंद हजार रुपए जुटाए और बैठ गए सड़क पर। 

इसे भी पढ़ें: वीआईपी के नकली अर्थ (व्यंग्य)

इस धंधे से गोबर गणेश का सड़क पर आना तय था। लेकिन जो पहले से ही सड़क पर हो वह और कितना सड़क पर आएगा। उल्टे वह चंद दिनों में धनवान बन गया। डिप्रेशन के किस्सो की बदौलत उसके पास 22 उपन्यास, 30 फिल्मी पटकथाएँ, सौ से अधिक गाने और अनगिनत स्टैंडअप कॉमेडी करने लायक चुटकुलों की भरमार हो गई। बॉलीवुड ने उससे पटकथाएँ, गाने खरीद लिए। उसे जमीन से आसमान पर पहुँचा दिया। बाकी बचे चुटकुले अपने साथ रखकर लोगों को हँसाने का काम कर रहा है।  

- डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

प्रसिद्ध नवयुवा व्यंग्यकार

प्रमुख खबरें

Federal Reserve गवर्नर Lisa Cook बोलीं, ट्रंप के पास पद से हटाने का कोई कानूनी आधार नहीं

Nepal Flash Flood में 162 लोगों की मौत, 133 भारतीयों समेत सैकड़ों लापता

Pulitzer Prize विजेता फोटोग्राफर Slava Veder का निधन, 99 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Nepal Floods: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कोलकाता के 32 तीर्थयात्री लापता