By Ankit Jaiswal | Jul 12, 2026
विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड और नॉर्वे के बीच खेला गया मुकाबला अब केवल नतीजे की वजह से नहीं, बल्कि एक विवादित गोल के कारण भी चर्चा में है। मुकाबले के बाद नॉर्वे के मुख्य कोच स्टोले सोलबाकेन ने इंग्लैंड के बराबरी वाले गोल पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसा लगा जैसे गेंद ऊपर लगे कैमरा तार से टकराकर अचानक नीचे आ गई थी।
हालांकि फीफा ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया।
बता दें कि यह मुकाबला अतिरिक्त समय तक चला, जिसमें जूड बेलिंगहैम के दो गोल की बदौलत इंग्लैंड ने नॉर्वे को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। मैच के दौरान सबसे पहले नॉर्वे ने एंड्रियास शेल्डेरुप के शानदार प्रयास से बढ़त बनाई थी। इसके बाद पहले हाफ के अतिरिक्त समय में जूड बेलिंगहैम ने इंग्लैंड के लिए बराबरी का गोल किया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नॉर्वे के खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन का मानना था कि गोल बनने से ठीक पहले गेंद ऊपर लगे कैमरा तार से टकराई थी, जिससे उसकी दिशा बदल गई और इंग्लैंड को फायदा मिला। स्टोले सोलबाकेन ने कहा कि गेंद सीधे आसमान से नीचे गिरती हुई दिखाई दी, जिससे उनके खिलाड़ियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अब मैच दोबारा नहीं खेला जाएगा और परिणाम स्वीकार करना ही होगा।
दूसरी ओर, फीफा ने पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया। फीफा के मुताबिक, गेंद में लगे विशेष सेंसर के आंकड़ों की जांच की गई, जिसमें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गेंद किसी कैमरा तार या अन्य बाहरी वस्तु से टकराई हो। फीफा ने स्पष्ट किया कि यदि गेंद किसी चीज से टकराती तो सेंसर में उसका रिकॉर्ड दर्ज होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
स्टोले सोलबाकेन ने कहा कि उन्होंने खुद उस क्षण गेंद को तार से टकराते हुए नहीं देखा, लेकिन गोलकीपर ओरजान नाइलैंड सहित कई खिलाड़ियों और टीम के सदस्यों को ऐसा महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि फीफा के तकनीकी आंकड़ों के खिलाफ वह कुछ नहीं कह सकते, लेकिन मैदान पर मौजूद कई लोगों का मानना है कि गेंद की दिशा असामान्य तरीके से बदली थी।
गौरतलब है कि नॉर्वे ने वर्ष 1998 के बाद पहली बार विश्व कप में जगह बनाई थी और इस बार पहली बार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा। हालांकि टीम का सफर यहीं समाप्त हो गया। स्टोले सोलबाकेन ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी टीम की इस शानदार उपलब्धि को केवल इस विवाद से याद किया जाए, बल्कि खिलाड़ियों के पूरे अभियान की सराहना होनी चाहिए।