By अनन्या मिश्रा | Jun 10, 2026
हिंदू धर्म में सभी तिथियों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। एकादशी को किया गया व्रत, जप, तप व ध्यान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक शास्त्रों को मुताबिक एकादशी का व्रत करने से सांसारिक जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। वहीं इस व्रत के प्रभाव से जातक जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है और अंत में बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है।
एकादशी तिथि को रात में नहीं सोना चाहिए। क्योंकि यह तिथि पुण्यदायी होती है और इस रात भगवान विष्णु के भजन गाने चाहिए, मंत्र या आरती सुननी चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर पूरी रात जागकर आदि करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाली योनि में जन्म लेता है। वहीं अगर आप द्वादशी तिथि को चावल खाते हैं, तो आपको इस योनि से मुक्ति मिल जाती है।
इस पावन तिथि को दातुन या मंजन करना वर्जित माना गया है। वहीं इस दिन क्रोध करना, चुगली करना, झूठ बोलना और दूसरों की बुराई करना आदि चीजों से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को परिवार बल्कि पूरे समाज में सम्मान नहीं मिलता है और पाप के भागी बनते हैं।
एकादशी तिथि को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। शास्त्रों में इसको वर्जित माना गया है। वहीं द्वादशी तिथि को जब पारण करें, तो तुलसी के पत्ते से ही करना चाहिए। लेकिन एकादशी तिथि को तुलसी की पत्ती नहीं तोड़ना चाहिए।
एकादशी तिथि को चना दाल, उड़द दाल, गोभी, मसूर दाल, गाजर, शलजम, पालक का साग आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं इस दिन शारीरिक और मानसिक रूप से किए जाने वाले बुरे कर्मों से बचना चाहिए।
एकादशी तिथि के दिन चोरी करना, हिंसा करना, पान खाना, मैथुन, क्रोध करना, स्त्रीगमन और कपट आदि चीजों से बचना चाहिए। वहीं अगर इस तिथि पर कोई गलती हो जाए, तो आपको उसके लिए माफी मांगनी चाहिए।