By अंकित सिंह | Feb 16, 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत ने रविवार को गोरखपुर दौरे के दौरान एक सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में भाग लिया। यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत आयोजित किया गया था। संघ सूत्रों के अनुसार, आरएसएस प्रमुख ने बाबा गंभीर नाथ सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में प्रमुख नागरिकों और स्वयंसेवकों को संबोधित किया। सम्मेलन से पहले, उन्होंने दीप प्रज्वलित करके संघ की 100 वर्षीय यात्रा और 'पंच परिवर्तन' विषय पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
उन्होंने आगे कहा कि भारत सद्भावना और सामाजिक सद्भाव का वैश्विक केंद्र है। देश की सभ्यतागत विचारधारा लेन-देन वाले रिश्तों के बजाय एकता और आपसी जुड़ाव की भावना में निहित है। भारत की विविधता पर प्रकाश डालते हुए भागवत ने कहा कि रीति-रिवाजों, पहनावे और परंपराओं में अंतर विभाजन पैदा नहीं करते, क्योंकि अंतर्निहित सांस्कृतिक एकता ही हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि हम भारत को अपनी माता मानते हैं। एक ही दिव्य चेतना हम सब में निवास करती है। यही बंधन हमें हमारी भिन्न पहचानों के बावजूद एकजुट रखता है।
उन्होंने आगे कहा कि समाज को केवल कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव भी बनाए रखता है। आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि यह उपलब्धि जश्न मनाने का नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण का विषय है। उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए वर्ष में दो से तीन बार ब्लॉक स्तर की बैठकें आयोजित करने का आह्वान किया और समुदायों से जातिगत सरोकारों से परे व्यापक हिंदू समाज के लिए काम करने का आग्रह किया।