GIST Cancer: पेट दर्द, थकान को न समझें मामूली, Experts ने GIST Cancer को बताया 'Silent Killer'

By अनन्या मिश्रा | Apr 18, 2026

दुनियाभर में तेजी से कैंसर की बीमारी बढ़ रही है। जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में बढ़ रहा है। वहीं कुछ दशकों पहले कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ या बुजुर्गों को होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता है। लेकिन अब बच्चे भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल अकेले भारत में 50 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं। वहीं कुछ खास तरह के कैंसर के मामले बच्चों में ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।

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हम सभी अक्सर लंग्स-ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओवेरियन जैसे कैंसर के बारे में सुनते और पढ़ते रहते हैं। एक्सपर्ट की मानें, तो कुछ तरह के कैंसर काफी दुर्लभ होते हैं, जिनकी चर्चा कम होती है। ऐसा ही एक कैंसर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर है, जिसके जोखिमों के बारे में हम सभी लोगों को अलर्ट होना चाहिए।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले

यह एक दुर्लभ लेकिन गंभीर तरह का कैंसर है। जोकि पाचन तंत्र में विकसित होता है। आमतौर पर यह कैंसर पेट और छोटी आंत में होता है। वहीं कुछ मामलों में यह बड़ी आंत, भोजन नली और मलाशय में भी हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले बहुत कम होते हैं, लेकिन यह अक्सर धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है। जेनेटिक म्यूटेशन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है।

GIST कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं। यह एक तरह से सॉफ्ट टिशू सारकोमा होता है।

आमतौर पर ट्यूमर आपके पेट या छोटी आंत में आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बनते हैं।

कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक इंच से छोटे हो सकते हैं। आमतौर पर इस तरह के ट्यूमर के कोई लक्षण नहीं होते हैं।

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर की पहचान

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर और इसके हर बार लक्षण हों यह जरूर नहीं है। कई बार लोगों को इसका तब पता चलता है, जब वह किसी और वजह से सर्जरी या टेस्ट करवाते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो सभी लोगों को पेट से संबंधित कुछ लक्षणों को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए, जिससे कम समय रहते इसकी पहचान हो सके।

अक्सर कब्ज और थकान की दिक्कत होना।

अक्सर पेट में दर्द रहना या शौच के साथ खून आना।

बिना किसी प्रयास के वेट लॉस होना।

भूख न लगना या फिर खाने की इच्छा न होना।

वहीं उल्टी के साथ खून आना।

कैंसर की वजह

इस कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम जेनेटिक म्यूटेशन माना जाता है। अधिकतर मामलों में KIT या PDGFRA जीन में बदलाव की वजह से कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती है और ट्यूमर का रूप ले लेती है। आमतौर पर यह म्यूटेशन पर जन्म के समय नहीं होता है। बाद में यह विकसित हो सकता है। इसलिए ज्यादातर मामलों में इसको वंशानुगत कैंसर नहीं माना जाता है। 

आमतौर पर इस कैंसर का खतरा 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में देखा जाता है।

कुछ दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से पीड़ित लोगों में कैंसर और ट्यूमर होने की आशंका बढ़ जाती है।

वहीं जिन लोगों में पहले किसी तरह का ट्यूमर रहा हो, या जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो। उनमें भी यह जोखिम ज्यादा हो सकता है।

बचाव

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो आमतौर पर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर को रोका नहीं जा सकता है। क्योंकि यह पर्यावरणीय या लाइफस्टाइल फैक्टर्स के बजाय जेनेटिक म्यूटेशन के कारण से होते हैं।

अब तक इसके बचाव का कोई पुख्ता तरीका नहीं खोजा गया है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे- व्यायाम करें और पौष्टिक आहार लें, वहीं स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखें। यह कैंसर के जोखिमों को कम करने के साथ इम्युनिटी को बढ़ाने में मददगार हो सकता है। 

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