By अभिनय आकाश | Aug 21, 2026
अयोध्या राम मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी पद से दान में अनियमितताओं के आरोपों के बीच हटने को मजबूर हुए चंपत राय ने एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता वाली मंदिर निर्माण समिति ने सभी फैसलों को मंज़ूरी दी और उनकी मदद के लिए नियुक्तियां कीं। उन्होंने कहा कि मिश्रा ने अपनी पसंद के लोगों को श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति में शामिल किया। राय ने बताया कि उनमें से एक व्यक्ति छह साल में सिर्फ़ दो बार अयोध्या आया, और दूसरे से सिर्फ़ सुरक्षा से जुड़े सुझाव ही मांगे गए। राय ने कहा कि तीसरा सदस्य नियमित था और हमेशा मिश्रा के साथ बैठकों में शामिल होता था। उन्होंने आगे कहा कि बैठकें हर महीने और कभी-कभी हर 15 दिन में होती थीं। राय ने ज़ोर देकर कहा कि समिति के पास पूरा अधिकार था। उन्होंने कहा कि समिति की मंज़ूरी के बिना कोई भी काम नहीं किया गया। राय ने उस पत्र में कहा अगर बाहर कोई फ़ैसला लिया गया, तो उसे स्वीकार नहीं किया गया। अगर कुछ किया गया, तो उसे हटा दिया गया। यह पत्र वायरल हो गया है और समिति के कामकाज को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
यह चिट्ठी राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने में गड़बड़ी के आरोपों की जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की आखिरी रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद लिखी गई थी। SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज में "बड़ी खामियां" तो बताई गई थीं, लेकिन उसने उन्हें और एक पूर्व ट्रस्टी को आरोपों से बरी कर दिया था। मिश्रा ने कमेटी के अंदरूनी मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्होंने राय की चिट्ठी नहीं देखी है। "जब तक मैं चिट्ठी नहीं देख लेता, तब तक मैं बस यही कहूंगा कि यह आपकी [मीडिया की] मनगढ़ंत कहानी है। ऐसी कोई चिट्ठी नहीं है और न ही ऐसी कोई आलोचना की गई है, भले ही वह नौ पन्नों की ही क्यों न हो। उन्होंने ऐसी कोई आलोचना नहीं की है। यह सिर्फ़ एक मनगढ़ंत कहानी है।