By अभिनय आकाश | Sep 07, 2026
भारतीय सेना की मारक क्षमता को लेकर अब एक ऐसा फैसला लिया गया है जो कि आने वाले दशकों तक देश की सरहद की सुरक्षा को नई दिशा देगा। AK203 एक ऐसी राइफल जिसने अपनी मजबूती और अचूक निशाने से दुनिया को अपना मुरीद बनाया। अब उसे अपनी शक्ति भी भारत से ही मिलेगी। अडानी डिफेंस एंड एयररोस्पेस ने इंडो रशियन राइफल प्राइवेट लिमिटेड आईआरआरपीएल के साथ 5 साल का मेगा एग्रीमेंट साइन कर लिया है। अब भारत की मिट्टी में ही बनी हुई गोलियां रूस की तकनीक से बनी हुई राइफलों से निकलेंगी। यह केवल एक कमर्शियल डील नहीं है बल्कि मेड इन इंडिया के सीने पर गर्व का नया तामगा भी है। अब सबसे पहले समझौते की गहराई को समझते हैं। अडानी डिफेंस ने अगले 5 सालों के लिए आईआरआरपीएल के साथ हाथ मिलाया। इस डील का मुख्य केंद्र है 7.62 * 39 एमm का स्मॉल कैलिबर एमुनेशन। यह वही गोलियां हैं जो कि AK 203 राइफल की जान मानी जाती हैं। इस समझौते का सबसे बड़ा जो रणनीतिक लाभ है वो यह है कि यह एक इंटीग्रेटेड डोमेस्टिक सप्लाई चेन का निर्माण करेगा।
इस पूरी कहानी में अडानी डिफेंस का रोल बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अडानी डिफेंस ने दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा एमुनेशन और मिसाइल कॉम्प्लेक्स विकसित किया है। यह जो फैसिलिटी है, यह केवल ईंट पत्थरों से नहीं बनी है बल्कि यह भारत की निजी क्षेत्र की रक्षा क्षमताओं का प्रतीक बन रही है। इस समझौते के तहत अडानी डिफेंस ना केवल गोलियों की सप्लाई करेगी बल्कि वह भारतीय सेना की कंटिन्यूटी ऑफ एमुनेशन यानी कि गोला बारूद की निरंतर उपलब्धता की गारंटी देगी। यह डिफेंस सेक्टर में प्राइवेट प्लेयर के बढ़ते हुए दबदबे को भी दिखाता है। कानपुर के प्लांट की क्षमता इतनी है कि वह ना केवल भारतीय सेना बल्कि आने वाले समय में मित्र देशों की जरूरतों को भी पूरा कर सकते हैं। यह आत्मनिर्भर भारत की उस सोच को साकार करता है जहां हम ना सिर्फ हथियार खरीदेंगे बल्कि उसके बड़े उत्पादक भी बनेंगे।