कश्मीर में जो होना था वो हो चुका, अब वार्ता के जरिये मसले सुलझाएँ

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Sep 02, 2019

भारत में कश्मीर के पूर्ण विलय को अब एक महीना हो रहा है। ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान अपनी-अपनी शाब्दिक गोलाबारी से थक गए हैं। दोनों देशों के नेताओं ने अब नया राग छेड़ा है। दोनों एक-दूसरे से बात करना चाहते हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा है कि यदि भारत सरकार कश्मीरी नेताओं को रिहा कर दे और उनसे उन्हें बात करने दे तो वे भारत से संवाद कर सकते हैं। इधर हमारे विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रुसेल्स में कहा है कि भारत भी पाकिस्तान से बात करने को तैयार है बशर्ते कि वह आतंकवाद और हिंसा का रास्ता छोड़ दे।

अब दोनों देशों के बीच परंपरागत युद्ध और परमाणु-मुठभेड़ की बात पर्दे के पीछे चली गई है। सच्चाई तो यह है कि अब भारत को तो अपनी तरफ से कुछ करना नहीं है। उसे जो करना था, वह उसने 5 अगस्त को कर दिया। जो कुछ करना था या अब करना है, वह पाकिस्तान को करना है। पाकिस्तान आज सीमित युद्ध छेड़ने की स्थिति में भी नहीं है। उसकी आर्थिक और राजनीतिक हालत भी डांवाडोल है। कश्मीर के सवाल पर दुनिया के एक राष्ट्र ने भी भारत की कार्रवाई का विरोध नहीं किया है। सिर्फ चीन कुछ बोला है लेकिन वह क्या बोला है, उसका मतलब क्या है, उसे खुद इसका पता नहीं है। वह खुद हांगकांग, सिक्यांग और तिब्बत के कारण फंसा हुआ है।

इसे भी पढ़ें: सबकुछ बदल गया पर दरबार मूव की परंपरा जारी रहेगी जम्मू कश्मीर में

वह पाकिस्तान का साथ देने का नाटक इसलिए कर रहा है कि एक तो उसे पाक ने कश्मीर की 5 हजार वर्ग किमी जमीन भेंट कर रखी है और दूसरा वह बलूचिस्तान को अपना अड्डा बना रहा है। अब चीन और पाकिस्तान के पास सिर्फ एक ही मुद्दा रह गया है। वह कश्मीर किसका है, यह नहीं, बल्कि यह कि वहां मानव अधिकारों का हनन हो रहा है। मानव अधिकारों की रक्षा के नाम पर अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठन चीन और पाकिस्तान की बातों पर कान जरूर देंगे लेकिन भारत सरकार की दक्षता पर यह निर्भर करेगा कि वह इस प्रोपेगंडा की काट कैसे करेगी ? क्या यह बेहतर नहीं होगा कि गिरफ्तार कश्मीरी नेताओं और पाकिस्तानी नेताओं से भी कुछ प्रमुख भारतीय नागरिक बात करने के लिए भेजे जाएं, ऐसे नागरिक जिनकी प्रतिष्ठा और प्रामाणिकता किसी सरकारी नेता से कम नहीं है ? इंदिरा गांधी, नरसिंह राव और अटलजी की सरकारें ऐसी करती रही हैं। जरूरी यह भी है कि कश्मीरी जनता की सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाए और उन पर से प्रतिबंध उठा लिए जाएं लेकिन उन्हें यह बता दिया जाए कि हिंसा और आतंक का प्रतिकार अत्यंक कठोर हो सकता है।

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

प्रमुख खबरें

सचिन तेंदुलकर के साथ Debut करने वाले Salil Ankola डिप्रेशन में, Pune के सेंटर में भर्ती हुए

Cooper Connolly का तूफानी शतक पड़ा फीका, Sunrisers Hyderabad ने जीता रोमांचक मैच

West Bengal: अब ममता बनर्जी नहीं रहीं मुख्यमंत्री, राज्यपाल आरएन रवि ने भंग की विधानसभा

Horoscope 08 May 2026 Aaj Ka Rashifal: सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल