अब लखनऊ में रहकर योगी सरकार को चुनौती देंगी प्रियंका गांधी

By अंकित सिंह | Oct 07, 2019

कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खासकर उत्तर प्रदेश की बात करें तो ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस वहां पर खड़ा होना ही नहीं चाहती। भले ही दिल्ली में बैठी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी हर रोज यूपी सरकार पर निशाना साधती हों पर स्थानीय नेताओं की इसमें कम ही दिलचस्पी देखने को मिलती है। कांग्रेस नेता लगातार पार्टी छोड़कर दूसरे पार्टियों में शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा नेता पार्टी लाइन से अलग हटकर भी राह पकड़ रहे हैं। नेताओं के इस रवैये से प्रियंका गांधी वाड्रा काफी नाराज चल रही है। ऐसे में पार्टी को एकजुट करने के लिए वह लखनऊ में अपना डेरा जमाने की तैयारी में है। कहा यह जा रहा है कि प्रियंका गांधी जल्द ही लखनऊ शिफ्ट हो सकती हैं। जहां से वह राज्य की पार्टी गतिविधियों पर ध्यान रख सकेंगी। यहां रहकर वहां की चीजों को समझेंगी और संगठन को मजबूत करेंगी। प्रियंका ने लखनऊ में अपना आवास तलाशना भी शुरू कर दिया है। 

माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी ने यह कदम अदिति सिंह प्रकरण के बाद ही उठाया है। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि 2022 विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश पर अपना ध्यान ज्यादा केंद्रित करना चाहती हैं। पार्टी सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रियंका गांधी अपनी दादी की मामी शीला कौल के लखनऊ के गोखले मार्ग स्थित घर को भी एक विकल्प के रूप में देख रही हैं। अब तक कांग्रेस परिवार का कोई भी सदस्य रायबरेली या फिर अमेठी में ही ठहरता था लेकिन अब प्रियंका पार्टी कार्यक्रमों को देखते हुए लखनऊ में शिफ्ट होने की कोशिश कर रही हैं। इसके अलावा पार्टी नेताओं से प्रियंका गांधी ने साफ कह दिया है कि वह दूसरे दलों के नेताओं को जोड़ने से बेहतर युवा और नए लोगों को कांग्रेस के साथ जोड़ें। प्रियंका ने यह भी कहा कि आप पार्टी की विचारधारा से लोगों को अवगत कराएं। 

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प्रियंका ने पार्टी नेताओं से यह भी कह दिया है कि अगर वह अलग राह पकड़ने की कोशिश करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह भी कहा जा रहा है कि प्रियंका गांधी के कहने पर ही रायबरेली से विधायक अदिति सिंह को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। बता दें कि आदिति सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2 अक्टूबर को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र में भाग लिया था। कांग्रेस ने इस विधानसभा सत्र का विरोध किया था। अदिति के हिस्सा लेने के बाद से कांग्रेस की खूब किरकिरी हुई थी। आदिति सिंह ने मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने का भी समर्थन किया था। फिलहाल अदिति सिंह ने किसी भी कारण बताओ नोटिस मिलने से इनकार किया है। क्या अदिति सिंह पर कोई कार्रवाई की जाएगी इस पर कांग्रेस के नेता कम ही बोल पा रहे हैं। अदिति सिंह को प्रियंका गांधी का करीबी बताया जाता है। 

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रायबरेली की 5 विधानसभा सीटों में से पिछले चुनाव में भाजपा के पास 2 सीटें आई थीं, कांग्रेस के पास दो सीटें थीं जबकि समाजवादी के पास 1 सीटें आई थीं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के एक विधायक का झुकाव पहले से ही भाजपा की तरफ है। ऐसे में अदिति सिंह के खिलाफ अगर कोई कार्रवाई की जाती है तो रायबरेली क्षेत्र की पांचों सीटों पर भाजपा का कब्जा हो सकता है। इसलिए अदिति सिंह के खिलाफ फिलहाल पार्टी कोई बड़े कार्रवाई की मूड में नहीं है। पार्टी का यह भाी मानना है कि अगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो भाजपा आने वाले दिनों में उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार सकती है। अदिति सिंह के पिता अखिलेश सिंह का रायबरेली में अच्छा प्रभाव रहा है। हाल ही में पार्टी द्वारा उप चुनाव के लिए जारी किए गए प्रचारकों की सूची में अदिति सिंह का भी नाम शामिल किया गया है। हालांकि कांग्रेस के कुछ नेताओं को यह नागवार गुजर रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि लखनऊ से प्रियंका गांधी किस तरीके से पार्टी को मजबूत कर पाने में कामयाब हो पायेंगी। 

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