By अनन्या मिश्रा | Feb 12, 2025
तिथि
पुण्य और महापुण्य काल
कुंभ संक्रांति के दिन पुण्य काल का समय दोपहर 12:36 मिनट से लेकर शाम 6:10 बजे तक है। फिर महापुण्य काल शाम 04:19 मिनट से लेकर 06:10 मिनट तक रहेगा। इस साल पुण्यकाल 05:34 मिनट है। वहीं महापुण्य काल 02:51 मिनट तक है।
महत्व
बता दें कि कुंभ संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यता के मुताबिक यदि इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाए, तो घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
अर्घ्य देने के नियम
इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि कर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
सूर्योदय के समय सूर्य नारायण को अर्घ्य देना उत्तम माना जाता है।
कुंभ संक्रांति पर तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, दूध, तिल, गुड़ और रोली डालकर अर्घ्य दें।
इस दौरान लोटे को सिर से थोड़ा नीचे रखते हुए धीरे-धीरे जल गिराते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।
साथ ही सूर्य देव के वैदिक मंत्रों का जाप करते रहें और सूर्य चालीसा का पाठ करें।
फिर धूप, दीप और कपूर से सूर्य नारायण की आरती करें।
इसके बाद सूर्य देव को फल, मिठाई और घर पर बने प्रसाद का भोग बनाएं।
फिर पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें।