तेल पर खेल, भारत-OPEC की बड़ी बैठक, हो गया फैसला!

By अभिनय आकाश | Sep 23, 2026

मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच दुनिया के ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर लगातार उतार-चढ़ाव देखने को भी मिल रहा है। लेकिन इसी बीच भारत ने भी दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के साथ एक बैठक की। नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ओपेक के महासचिव हैमल गैस के बीच इंडिया ओपेक एनर्जी डायलॉग की सातवीं हाई लेवल बैठक हुई और दोनों ने ही बैठक की सह अध्यक्षता की। इस बैठक में सबसे अहम मुद्दे रहे तेल बाजार की स्थिरता, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल उद्योग में पर्याप्त और समय पर निवेश। इसके अलावा दोनों पक्षों ने आने वाले समय के लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऊर्जा बाजार के आउटलुक पर चर्चा की। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। वहीं ओपेक में दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इसीलिए भारत के लिए यह बेहद जरूरी है कि तेल उत्पादक देशों के साथ लगातार संवाद बना रहे और वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में बातचीत के रास्ते खुले रहे। 

इसे भी पढ़ें: 14 सितंबर को संविधान सभा ने हिंदी को दिया था आधिकारिक दर्जा, जानें इतिहास की घटनाएं


वहीं ओपेक महासचिव हैदरमल ने भारत के साथ इस संवाद को ओपेक की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में भारत का महत्व लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दशक में यह महत्व और ज्यादा बढ़ेगा। उन्होंने ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के संतुलित और व्यवहारिक दृष्टिकोण की भी सराहना की। हैतामल ने यह भी कहा कि भारत की कई ऊर्जा प्राथमिकताएं ओपेक की प्राथमिकताओं से मेल खाती हैं। भारत और ओपेक के बीच यह बातचीत आज से शुरू नहीं हुई। इंडिया ओपेक एनर्जी डायलॉग की शुरुआत 2015 में नई दिल्ली में हुई थी। इसका मकसद साफ था। तेल उत्पादक देशों और भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के बीच नियमित बातचीत का एक मंच तैयार करना था। क्योंकि दोनों की जरूरतें अलग होते हुए भी एक दूसरे से जुड़ी हैं। ओपेक देशों के लिए भारत एक बड़ा और बढ़ता हुआ ऊर्जा बाजार है। जबकि भारत के लिए ओपेक के सदस्य देश कच्चे तेल के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसीलिए इस मंच पर सिर्फ तत्काल तेल की कीमतों की चर्चा नहीं होती बल्कि लंबी अवधि की ऊर्जा मांग, निवेश, बाजार की स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बातचीत होती है।

इसे भी पढ़ें: Hindi Diwas: संविधान सभा ने 14 सितंबर को हिंदी को दिया था राजभाषा का दर्जा


इस बार भी बैठक में दोनों पक्षों ने अब तक हुए तकनीकी सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया। साथ ही तय किया गया कि इंडिया ओपेक एनर्जी डायलॉग की अगली यानी आठवीं हाई लेवल बैठक वियना ऑस्ट्रिया में होगी। कुल मिलाकर मध्य पूर्व के तनाव और और वैश्विक ऊर्जा बाजार में खींचतान के बीच भारत ओपेक की यह बैठक आने वाले समय की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम रही क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरत आने वाले सालों में बढ़ने वाली है और ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि तेल की सप्लाई भरोसेमंद रहे।

प्रमुख खबरें

Festival Capital of the World लुइसियाना में Jazz Fest और Food Culture का लें अनोखा आनंद

Bank Strike से पहले RBI का बड़ा कदम, 27 सितंबर रविवार को खुलेंगी सभी शाखाएं

AI के खतरों की आशंकाएं बढ़ा-चढ़ाकर बताई गईं, Global Ban संभव नहीं: Sridhar Vembu

विचारों का मतभेद सामान्य बात...SIR पर खुलासे पर चुनाव आयोग की सफाई 10 प्वाइंट में समझें