By रेनू तिवारी | Jul 22, 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कीमती धातुओं के बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण मुद्रास्फीति (Inflation) की आशंकाएं बढ़ रही हैं। इसके जवाब में यदि वैश्विक केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टालते हैं या सख्त मौद्रिक नीति (Tight Monetary Policy) बनाए रखते हैं, तो अल्पावधि (Short-term) में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। विश्लेषकों ने यह बात कही। विश्लेषकों के अनुसार, आमतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से बढ़ने वाली मुद्रास्फीति की आशंकाएं कीमती धातुओं को समर्थन देती हैं लेकिन यदि इसके जवाब में केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति अपनाते हैं तो सर्राफा कीमतों में निकट अवधि की तेजी सीमित रह सकती है।
उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से पैदा हुए मुद्रास्फीति के दबाव के कारण सोने और चांदी में मजबूत तेजी देखने को मिलती है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के हालिया घटनाक्रम के दौरान सोने और चांदी ने बाजार की इस पारंपरिक धारणा के विपरीत प्रदर्शन किया है। इस संघर्ष से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये होने वाली वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा प्रभावित होने का खतरा पैदा हुआ है। पिछले सप्ताह से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद जिंस बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले फरवरी के अंत में ब्रेंट क्रूड करीब 68 डॉलर प्रति बैरल पर था।
अप्रैल के मध्य में तनाव चरम पर पहुंचने के दौरान यह बढ़कर 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इसके बाद अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम होने पर तेल की कीमतें घटकर लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं लेकिन बाद में फिर बढ़कर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल हो गईं। ऊर्जा बाजार में इस उतार-चढ़ाव के साथ कीमती धातुओं में भी तेज गिरावट आई। इस वर्ष की शुरुआत में 5,706 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सोना का वायदा भाव करीब 29 प्रतिशत टूटकर लगभग 4,070 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
इसी तरह, 29 जनवरी को 124.25 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद चांदी की वायदा कीमत में 52 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में चांदी फिलहाल लगभग 59 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है। विश्लेषकों का कहना है कि हालिया तेल आपूर्ति व्यवधानों से कीमती धातुओं में तेज उछाल आने के बजाय यह उम्मीद मजबूत हुई है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखेंगे।
इससे अल्पावधि में सर्राफा कीमतों की तेजी सीमित रह सकती है। उनके अनुसार, मुद्रास्फीति के दबाव पर केंद्रीय बैंकों की प्रतिक्रिया भी निकट अवधि में कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा तय करेगी। मानव मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालिया तनाव ने विभिन्न जिंस बाजारों के रुख में अंतर को उजागर किया है। आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बना हुआ है जबकि सर्राफा इस तेजी का साथ नहीं दे पाया है। निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती हैं। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा-शोध) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अब कच्चे तेल की ऊंची कीमतों पर बाजार की प्रतिक्रिया केवल मुद्रास्फीति पर नहीं बल्कि इस बात पर अधिक निर्भर करेगी कि वैश्विक केंद्रीय बैंक क्या कदम उठाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति की उम्मीदें बढ़ती हैं और अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) सख्त रुख बनाए रखता है या ब्याज दरों में कटौती टाल देता है, तो अल्पावधि में सर्राफा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।’’ त्रिवेदी ने कहा, ‘‘ हालांकि, एक बार ऊंची ब्याज दरों का असर पूरी तरह बाजार में समाहित हो जाने और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बनी रहने पर निवेशक मुद्रास्फीति से बचाव के साधन के रूप में फिर सोने और चांदी का रुख करेंगे जिससे इनमें मजबूती आ सकती है।’’ चॉइस ब्रोकिंग की जिंस विश्लेषक कावेरी मोरे ने कहा कि चांदी कीमती धातु होने के साथ-साथ औद्योगिक धातु भी है।
इसलिए ऊर्जा कीमतों में तेजी के दौर में यह सोने की तुलना में अधिक संवेदनशील रहती है। उन्होंने कहा कि चांदी के मामले में डॉलर, मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति और बॉन्ड प्रतिफल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्लेषकों ने कहा कि जिंस बाजार की दिशा का आकलन करने के लिए निवेशकों को कच्चे तेल के भंडार, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम, मुद्रास्फीति के आंकड़ों, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर की चाल पर नजर रखनी चाहिए।