नए इनकम टैक्स ड्राफ्ट नियमों के बीच चर्चा में आई Old Regime, फिर से बन सकती है फायदेमंद; इन्हें मिलेगी राहत

By जे. पी. शुक्ला | Mar 30, 2026

प्रस्तावित ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 पुराने बनाम नए टैक्स सिस्टम की बहस को चुपचाप बदल सकता है। हालांकि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 ने एक बड़ा स्ट्रक्चरल रीसेट और टैक्स की भाषा को आसान बनाया, लेकिन ज़्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए असली सवाल आसान है: क्या मैं ज़्यादा टैक्स बचाऊंगा? नया एक्ट और नियम 1 अप्रैल, 2026 (टैक्स साल 2026–27) से लागू होंगे। 

हालांकि ये नियम अभी ड्राफ्ट फॉर्म में हैं, लेकिन ये सिर्फ प्रोसेस और लिमिट बदलने से कहीं ज़्यादा हैं। ड्राफ्ट नियम चुपचाप यह बताते हैं कि कई नई छूट, एग्ज़ेम्प्शन और ज़्यादा लिमिट से मुख्य रूप से पुराने टैक्स सिस्टम के तहत टैक्सपेयर्स को फ़ायदा हो सकता है, खासकर सैलरी पाने वाले परिवारों को। ये बदलाव इस बात की शुरुआती झलक देते हैं कि दोनों सिस्टम के बीच बैलेंस कैसे बन सकता है।

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क्यों फिर चर्चा में आया Old Regime?

- ड्राफ्ट नियमों में भत्तों (Allowances) और छूट (Exemptions) को बढ़ाने का प्रस्ताव है

- इससे टैक्सेबल इनकम कम हो सकती है

- कई मामलों में कुल टैक्स बोझ घट सकता है

- वेतनभोगी कर्मचारियों को अधिक राहत मिलने की संभावना

ड्राफ्ट के अनुसार, वेतन से जुड़े भत्तों और सुविधाओं की सीमा बढ़ाने से कर योग्य आय घटेगी और टैक्स कम देना पड़ सकता है।

क्या बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं?

- शिक्षा और हॉस्टल भत्ता में बड़ा इजाफा

- शिक्षा भत्ता: ₹100 से बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह (प्रस्तावित)

- हॉस्टल भत्ता: ₹300 से बढ़ाकर ₹9000 प्रति माह

- HRA (हाउस रेंट अलाउंस) और अन्य वेतन भत्तों में राहत

- अधिक डिडक्शन और छूट का दायरा बढ़ाया गया

कुल मिलाकर, कई मामलों में टैक्सेबल इनकम में बड़ी कमी हो सकती है। 

कितना हो सकता है फायदा?

- ₹20 लाख सालाना कमाने वाला व्यक्ति करीब ₹1.25 लाख तक बचा सकता है

- ₹35 लाख आय पर लगभग ₹1.4 लाख तक की बचत संभव

- कुछ मामलों में कुल छूट 70–75% तक बढ़ने की संभावना

कई सैलरी पाने वाले लोगों के लिए, खासकर जिनके बच्चे हैं, ज़्यादा किराया और स्ट्रक्चर्ड अलाउंस हैं, अब जवाब शायद अपने आप “नहीं” न हो। क्योंकि नियम अभी भी ड्राफ़्ट स्टेज में हैं, इसलिए फ़ाइनल वर्शन बदल सकता है। लेकिन अलाउंस बूस्ट ने निश्चित रूप से पुराने टैक्स सिस्टम को फिर से बातचीत में ला दिया है।

किन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है Old Regime?

1. वेतनभोगी कर्मचारी (Salaried Class)

- जिनकी सैलरी में HRA, LTA, भत्ते शामिल हैं

- कंपनी से मिलने वाले लाभ (Perks) ज्यादा हैं

2. टैक्स सेविंग निवेश करने वाले

- जो 80C, 80D, NPS, होम लोन जैसी कटौतियों का पूरा फायदा लेते हैं

3. परिवार वाले करदाता

- बच्चों की शिक्षा, किराया, मेडिकल खर्च वाले लोग

- अधिक भत्तों का लाभ उठा सकते हैं

4. मिडिल क्लास टैक्सपेयर

- जिनकी आय मध्यम है और खर्च/डिडक्शन ज्यादा हैं

क्या New Regime अभी भी बेहतर है?

New Regime अभी भी डिफॉल्ट सिस्टम है, क्योंकि इसमें:

- कम टैक्स दरें

- कम कागजी काम

- सरल गणना

- लेकिन इसमें ज्यादातर डिडक्शन और छूट नहीं मिलती

क्या बदलेंगे टैक्स स्लैब?

- ड्राफ्ट नियमों में टैक्स स्लैब या दरों में बदलाव नहीं है

- बदलाव मुख्य रूप से छूट और भत्तों में हैं

ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

- यह अभी ड्राफ्ट (प्रस्ताव) है, अंतिम कानून नहीं

- संसद की मंजूरी के बाद ही लागू होगा

- हर व्यक्ति के लिए सही विकल्प अलग होगा

- दोनों रेजीम का तुलनात्मक विश्लेषण जरूरी

नए ड्राफ्ट नियमों ने Old Tax Regime को फिर से प्रासंगिक बना दिया है। खासकर वेतनभोगी और डिडक्शन का लाभ लेने वाले करदाताओं के लिए यह अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने आय, खर्च और निवेश के आधार पर दोनों विकल्पों की तुलना करना जरूरी है।

हाल के सालों में 80% से ज़्यादा इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स कम टैक्स रेट और कम डिडक्शन की वजह से नए सिस्टम में शिफ्ट हो गए हैं। हालांकि, पुराने सिस्टम में टैक्सपेयर्स एग्ज़ेम्प्शन और डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। चैलेंज हमेशा ब्रेकइवन पॉइंट तक पहुंचना रहा है। आने वाले समय में यह तय होगा कि टैक्सपेयर्स के लिए सरलता (New Regime) ज्यादा मायने रखती है या बचत (Old Regime)।

- जे. पी. शुक्ला

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