Winter Session की शुरुआत से पहले बोले LS अक्ष्यक्ष Om Birla, कहा- संविधान को राजनीति से दूर रखना चाहिए

By रितिका कमठान | Nov 25, 2024

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत सोमवार 25 नवंबर से होने वाली है। शीतकालीन सत्र की शुरुआत होने के साथ ही संसद में तीन मुख्य विधेयक पेश किए जाते है। इस बार हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने के बाद शुरू हो रहे इस सत्र में सरकार की स्थिति मजबूत होने की संभावना है। वहीं संसद सत्र शुरु होने के पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को एएनआई से बात की है। 

उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी या विचारधारा की सरकार संविधान की मूल भावना (या संरचना) को प्रभावित नहीं कर सकती। बिरला ने कहा कि संविधान में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, लेकिन लोगों के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए। लोकसभा अध्यक्ष विपक्ष के उन आरोपों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि सरकार संविधान में बदलाव करेगी। लोकसभा अध्यक्ष ने आगे बताया कि संविधान में बदलाव सामाजिक बदलाव के लिए भी किए गए हैं।

लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा, "लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों तथा पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर संविधान में बदलाव किए गए हैं। सामाजिक परिवर्तन के लिए भी बदलाव किए गए हैं। लेकिन किसी भी राजनीतिक दल, किसी भी सरकार ने संविधान की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ नहीं की है। यही कारण है कि न्यायपालिका को समीक्षा करने का अधिकार है, ताकि मूल ढांचा बना रहे। इसलिए, यहां हमारे देश में, किसी भी पार्टी की विचारधारा की सरकार कभी भी संविधान की मूल भावना के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकती है।"

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने हमेशा कहा है कि समाज के वंचित, गरीब, पिछड़े लोगों को अभी भी आरक्षण की जरूरत है और इसलिए सरकार संविधान के मूल दर्शन के तहत काम करती है ताकि उनके जीवन में खुशहाली आ सके, उनके जीवन में सामाजिक बदलाव आ सके।’’ लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नियम और परंपराएं दिशा और दृष्टि प्रदान करती हैं, तथा शिष्टाचार बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।

बिरला ने कहा, "नियम और परंपराएं एक दृष्टि देती हैं, एक दिशा देती हैं। इसीलिए बाबासाहेब ने उस समय कहा था कि यह संविधान में आस्था रखने वाले लोगों और इसे लागू करने वालों पर निर्भर करेगा। आज भी, चाहे वह संविधान हो या संसद, हमारे आचरण में मर्यादा के उच्च मानदंड होने चाहिए। आचरण और सोच के मानदंड जितने ऊंचे होंगे, हम संस्थानों की गरिमा को उतना ही बेहतर ढंग से बढ़ा पाएंगे... मेरा मानना ​​है कि हमारे सदन की गरिमा और उच्च-स्तरीय परंपराओं को बनाए रखने के लिए बहुत कुछ सदस्यों के आचरण और व्यवहार पर निर्भर करता है।"

प्रमुख खबरें

Derek O Brien का तंज, INDIA Rally के बाद BJP नेतृत्व सड़कों पर कर रहा नकल

वाणिज्य मंत्रालय का Scotch Whisky आयात पर शुल्क रियायतें बनाए रखने का भरोसा

Asian Champions Trophy: भारत ने South Korea को 8-0 से हराया, सेमीफाइनल में फिर होगी भिड़ंत

Maharashtra FDA Action: नियमों के उल्लंघन पर 19 खाद्य इकाइयों के लाइसेंस रद्द, नौ करोड़ का माल जब्त