By रेनू तिवारी | Jan 10, 2026
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को पाकिस्तान और भारत की सैन्य तैयारियों को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। 'पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल' को संबोधित करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) ने पाकिस्तान को इस कदर झकझोर दिया कि उसे आनन-फानन में अपने संविधान तक में संशोधन करना पड़ा।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को संविधान संशोधन करने के लिए मजबूर किया, जो इस बात की स्वीकारोक्ति है कि पड़ोसी देश के लिए सब कुछ ठीक नहीं रहा। ‘‘पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल’’ को संबोधित करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान में हाल ही में जल्दबाजी में किए गए संवैधानिक बदलाव बताते हैं कि उस ऑपरेशन के दौरान उन्हें अपनी व्यवस्था में कई कमियां और खामियां मिलीं। उन्होंने कहा, ऑपरेशन सिंदूर अभी सिर्फ थमा है।
पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में किए गए संशोधनों पर चर्चा करते हुए सीडीएस ने कहा कि वहां ‘जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया गया है और उसके स्थान पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) का पद बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने यह भी प्रावधान किया है कि यह पद केवल सेना प्रमुख (सीओएएस) के पास ही रहेगा, जो संयुक्त कमान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।
जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ने ‘नेशनल स्ट्रेटजी’ कमान और ‘आर्मी रॉकेट फोर्स’ कमान बनाकर शक्तियों का केंद्रीकरण किया है। उन्होंने बताया कि अब वहां का थल सेना प्रमुख जमीनी संचालन, संयुक्त अभियान और परमाणु मामलों के लिए भी जिम्मेदार होगा। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा किए गए ये बदलाव केवल थल सेना को प्राथमिकता देने वाली मानसिकता को दर्शाते हैं।
पाकिस्तान की विफलता: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अपनी सैन्य और रणनीतिक व्यवस्था में भारी कमियां और खामियां पाईं।
संवैधानिक संशोधन: अपनी कमियों को छिपाने और व्यवस्था सुधारने के लिए पाकिस्तान को कानूनी और संवैधानिक बदलावों का सहारा लेना पड़ा।
ऑपरेशन का भविष्य: यह ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, रणनीतिक रूप से इसे केवल विराम दिया गया है।
देश की सैन्य शक्ति को एकीकृत करने के लिए प्रस्तावित 'जॉइंट थिएटर कमांड' (Joint Theatre Commands) पर चर्चा करते हुए जनरल चौहान ने एक महत्वपूर्ण समयसीमा साझा की।
नई डेडलाइन: केंद्र सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 30 मई 2026 तक का समय दिया है।
समय से पहले लक्ष्य: हालांकि सरकार ने 2026 तक की मोहलत दी है, लेकिन सशस्त्र बल इस ढांचे को समय सीमा से काफी पहले तैयार करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
अंतिम चरण में प्रक्रिया: जनरल चौहान ने इसे अपनी प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक बताया और कहा कि वर्तमान में यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।
थिएटर कमांड का उद्देश्य सेना के तीनों अंगों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) को एक ही कमान के नीचे लाना है, ताकि युद्ध या किसी भी सैन्य संकट की स्थिति में त्वरित और समन्वित निर्णय लिए जा सकें।
News Source- Press Trust of India