विपक्ष ने अर्थव्यवस्था, महंगाई पर सरकार को घेरा; भाजपा ने कहा..गरीब कल्याण के लिये संकल्पित

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 15, 2021

नयी दिल्ली |कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, राकांपा सहित विपक्षी दलों ने मंगलवार को अर्थव्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे पर लोकसभा में सरकार को घेरते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था अवरोधों से जूझ रही है, हर जगह संकट की स्थिति है और सरकार अवास्तविक लक्ष्यों के लिए आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है।

वहीं,भारतीय जानता पार्टी (भाजपा) ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के काल में जहां अमेरिका, यूरोप सहित विकसित देशों का स्वास्थ्य ढांचा, अर्थव्यवस्था अब भी प्रभावित है, वहीं भारत में इन दोनों क्षेत्रों में स्थिति बेहतर हुई है।

भाजपा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने अर्थव्यवस्था, किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित गरीबों के कल्याण के लिये सतत प्रयास किया है और इस अनुपूरक मांग में इसका स्पष्ट उल्लेख है।

निचले सदन में 2021-22 की पूरक अनुदान मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा की शुरूआत करते हुए हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि नोटबंदी और अब कोरोना वायरस महामारी की वजह से हमारे देश की अर्थव्यवस्था अवरोधों से जूझ रही है और हर जगह संकट की स्थिति है।

उन्होंने दावा किया कि ऐसे में सरकार अवास्तविक लक्ष्यों के लिए आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है और वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत लंबी-चौड़ी अनुदान की अनुपूरक मांगें इस बात का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शी आंकड़े और वास्तविक लक्ष्य रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार विनिवेश के लक्ष्यों को भी प्राप्त करने में विफल रही है।

थरूर ने कहा कि एअर इंडिया के निजीकरण के बाद देश के करदाताओं पर बोझ पड़ेगा और लंबे समय तक इसकी परेशानियां झेलनी पड़ेंगी। कांग्रेस सदस्य ने कहा कि महामारी से ग्रामीण इलाकों पर भी प्रभाव पड़ा है और ऐसे में अनुपूरक मांगों में मनरेगा के लिए 22,039 करोड़ रुपये की मांग अपर्याप्त है।

थरूर ने दावा किया कि वित्त मंत्री ने इस साल बजट में रक्षा क्षेत्र पर कुछ नहीं कहा था और अनुपूरक मांगों में भी रक्षा क्षेत्र के लिए कोई धन की अनुमति नहीं मांगी गयी है। उन्होंने कृषि क्षेत्र को भी नजरंदाज करने का आरोप लगाया।

वहीं, भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि कोरोना महामारी के काल में जहां अमेरिका, यूरोप सहित विकसित देशों का स्वास्थ्य ढांचा, अर्थव्यवस्था अब भी प्रभावित है, वहीं भारत में इन दोनों क्षेत्रों में स्थिति बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे में विपक्ष को सरकार, वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री की भी सराहना करनी चाहिए।

दुबे ने कहा कि एअर इंडिया की स्थिति पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत संप्रग सरकार की नीतियों एवं भ्रष्टाचार के कारण खराब हुई जो अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान लाभ में चल रही थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार इससे उबरने में लगी है और इसी उद्देश्य से निजीकरण किया गया है।

दुबे ने कहा कि हम टाटा को कर्ज मुक्त कंपनी देना चाहते हैं। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध की मांग करते हुए कहा कि ब्लॉक चेन प्रौद्योगिकी का कोई मालिक नहीं है और हम इसे रोक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि हम हवाला, पोर्नोग्राफी, और मादक पदार्थों का नियमन नहीं कर सकते।

भाजपा सांसद ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी का विधेयक लाने से पहले इसका आकलन करना चाहिए और प्रतिबंध लग जाए तो ठीक रहेगा। चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक के दयानिधि मारन ने सांसद क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड)को निलंबित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सांसदों को बहुत दिक्कत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को सांसद निधि बहाल करने के साथ ही इसमें आवंटन भी बढ़ाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत 950 रुपये तक पहुंच गई है, लेकिन सरकार उपभोक्ताओं को 12 रुपये महीने की सब्सिडी देकर अपनी पीठ थपथपा रही है। तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि वित्त मंत्री को सबसे बड़ी ‘सेल्सवुमेन’ के तौर पर याद किया जाएगा क्योंकि वह एअर इंडिया, कई सरकारी बैंकों और दूसरी सरकारी संपत्तियों को बेच रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उदारीकरण के नाम पर तीन-चार कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।

राय ने कहा कि अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से पटरी पर आने के संकेत नहीं हैं, बेरोजगारी और महंगाई बढ़ रही है, लेकिन सरकार की नीति में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। जनता दल (यूनाइटेड) के सुनील कुमार पिंटू ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ का उल्लेख किया और कहा कि नदियों को जोड़ने से बाढ़ को रोकने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना बहुत जरूरी है। चर्चा में हिस्सा लेते हुए बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के लिए बजट आवंटन के लिए मापदंडों को फिर से निर्धारित करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि राज्यों के सामने वित्तीय प्रबंधन का संकट है, इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। वहीं, राकांपा की सुप्रिया सुले ने कहा कि सरकार मनरेगा के लिए धन दे रही है लेकिन इस ओर भी ध्यान देना होगा कि रोजगार की बढ़ती मांग को देखते हुए जरूरतें बढ़ती जा रही हैं।

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