Manipur Viral Video पर बवाल मगर Rajasthan-Bengal की घटनाओं पर विपक्ष नहीं करता सवाल, आखिर यह दोहरापन क्यों?

By नीरज कुमार दुबे | Jul 21, 2023

मणिपुर की घटना को लेकर देश आक्रोश में है क्योंकि महिलाओं के साथ ऐसा अमानवीय बर्ताव सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। लेकिन बात जब महिलाओं के सम्मान और उनके स्वाभिमान की रक्षा की हो रही है तो हमें देश के हर राज्य में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराध को समान रूप से देखते हुए अपनी आवाज उठानी चाहिए और दोषी पर सख्त कार्रवाई करने की मांग करनी चाहिए। देखा जाये तो जो लोग सिर्फ मणिपुर की घटना वाले वीडियो को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को घेर रहे हैं या सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियां कर रहे हैं वह बस घटना को लेकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। यदि ऐसे लोगों को महिलाओं के सम्मान की वास्तव में चिंता है तो उन्हें भी राजस्थान और पश्चिम बंगाल में महिलाओं की साथ घटी हालिया घटनाओं की निंदा या आलोचना करने का साहस दिखाना चाहिए, पीड़ितों को राहत दिलाने की मांग करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग करनी चाहिए। हैरत इस बात पर भी होती है कि सिर्फ चुनिंदा घटनाओं पर ही न्यायालय स्वतः संज्ञान क्यों लेते हैं? 


राजस्थान के हालात


बात अगर राजस्थान की करें तो हाल ही में सबने देखा था कि कैसे पुलवामा शहीदों की विधवाओं को धरने प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा था। यही नहीं, वीरों की इस भूमि पर आये दिन महिलाओं के साथ जघन्य अपराध की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। प्रियंका वाड्रा यूपी की किसी घटना को लेकर सड़कों पर धरना शुरू कर देती हैं लेकिन राजस्थान पर चुप हो जाती हैं। ऐसी ही हालत तमाम विपक्षी नेताओं की है। राजस्थान की हालिया जघन्य घटनाओं की बात करें तो इसी सप्ताह जोधपुर जिले में एक ही परिवार के चार सदस्यों की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई और शवों को जलाने का प्रयास किया गया। मृतकों में छह महीने की बच्ची भी शामिल है। पुलिस ने हालांकि इस मामले में मृतकों के एक रिश्तेदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने जमीन विवाद व रंजिश के चलते यह अपराध किया है। लेकिन भाजपा ने इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार को घेर लिया है। भाजपा का यह भी आरोप है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य को ‘बदनाम और शर्मसार’ कर दिया है। भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले जोधपुर में पिछले दिनों एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई लेकिन गहलोत इस प्रकरण पर पर्दा डालने की कोशिश करते रहे। भाजपा का आरोप है कि राजस्थान में जितनी भी बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की घटनाएं हुईं, विशेष तौर से दलित महिलाओं के साथ, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। भाजपा ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि राजस्थान महिलाओं के साथ होने वाले अपराध में नंबर एक बन चुका है। भाजपा का आरोप है कि राजस्थान में रोज बलात्कार की 17 से 18 घटनाएं होती हैं, सात हत्याएं रोजाना होती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का भी कहना है कि महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा आपराधिक घटनाएं राजस्थान में हुई हैं। उनका आरोप है कि 54 महीने में 10 लाख से अधिक घटनाएं हुई हैं। महिलाओं के साथ अत्याचार और दुष्कर्म के 2 लाख मुकदमे दर्ज़ कराए गए हैं। दुष्कर्म की घटनाओं में राजस्थान नंबर वन प्रदेश बन गया है।

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पश्चिम बंगाल के हालात


वहीं बात पश्चिम बंगाल की करें तो तृणमूल कांग्रेस आज भले शहीद दिवस मना रही है लेकिन वह यह हिसाब नहीं दे रही कि हालिया पंचायत चुनावों में जो लोग मारे गये हैं उन्हें कब न्याय दिलाया जायेगा। भाजपा की ओर से पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनावों के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा की जांच के लिए गठित पांच महिला सांसदों की जांच समिति ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को ‘‘अराजक’’ प्रदेश बना दिया है, वहीं नड्डा ने कहा कि रिपोर्ट राज्य में ‘‘अराजकता’’ की स्थिति और राजनीतिक विरोधियों के प्रति तृणमूल कांग्रेस की सरकार की ‘‘असंवेदनशीलता’’ को उजागर करती है। हम आपको बता दें कि राज्यसभा की सदस्य सरोज पांडेय को इस समिति का संयोजक बनाया गया था। सांसद रमा देवी, अपराजिता सारंगी, कविता पाटीदार और संध्या राय को इस समिति का सदस्य बनाया गया था। समिति के सदस्यों ने मंगलवार को उत्तर 24 परगना के हिंसा प्रभावित देगंगा का दौरा किया था और आगजनी के संबंध में सीधे जानकारी जुटाने के अलावा उन लोगों से मुलाकात की थी जिनके घर जला दिए गए थे। अगले दिन बुधवार को पांच महिला सांसदों की टीम ने हावड़ा जिले के आमटा का दौरा किया और पंचायत चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात की थी। महिला सांसदों की समिति से पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व वाले पार्टी के तथ्यान्वेषी दल ने भी बंगाल का दौरा किया था और हिंसा के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी।

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