विपक्ष ने अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर साधा निशाना, भाजपा ने आम लोगों के सशक्तीकरण के लिये समर्पित बताया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 11, 2019

नयी दिल्ली। विपक्ष ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था की ‘‘फील गुड’’ तस्वीर पेश करने का प्रयास कर रही है लेकिन गरीबी, बेरोजगारी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सहित अनेक मोर्चों पर भारतीय अर्थव्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि भाजपा ने जोर दिया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले पांच वर्ष से अधिक समय में उज्ज्वला, आयुष्मान, आवास योजना सहित अनेक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से न केवल लोगों के सशक्तीकरण का काम किया बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल की। निचले सदन में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक 2019 को चर्चा एवं पारित किये जाने के लिये रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक की लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी और अब सरकार विचार-विमर्श के बाद इसे लाई है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का मकसद भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि भारत में काफी मात्रा में वित्तीय सेवाएं और इनसे जुड़े विषय आते हैं और लंदन और सिंगापुर की तर्ज पर ऐसा वित्तीय केंद्र भारत को सशक्त बनायेगा।विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि अर्थव्यवस्था संख्या का खेल होता है लेकिन वास्तविक कहानी मानवीय दृष्टिकोण से जुड़ी होती है। अगर कारोबार नहीं हो रहा हो तो लोग प्रभावित होते हैं। कई क्षेत्रों में रोजगार कम होते हैं और अंतत: इसका प्रभाव लोगों के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अर्थव्यवस्था की ‘फील गुड’ तस्वीर पेश करने की कोशिश कर रही है लेकिन यह वास्तविकता से परे है।

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कार्ति चिदंबरम की गुजरात के ‘‘ड्राई स्टेट’ होने संबंधी टिप्पणी पर चौधरी ने कहा कि कांग्रेस सदस्य ने कहा है कि चूंकि गुजराज ‘ड्राई स्टेट’ है और वहां दारू नहीं मिलती है, ऐसे में वहां ऐसा केंद्र सफल नहीं होगा, यह निंदनीय टिप्पणी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महात्मा गांधी की बात करती है लेकिन उनके विचारों के खिलाफ बात करती है। द्रमुक के डी एम काथिर आनंद ने कहा कि देश के समक्ष गरीबी, बेरोजगारी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी समस्याएं हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था भी चुनौतियों का सामना कर रही है। एक तरफ उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ा है, दूसरी तरफ कारोबारी वर्ग में विश्वास की कमी आई है।उन्होंने कहा कि इस विधेयक में देश के पश्चिमी क्षेत्र का ध्यान रखा गया है, जबकि तमिलनाडु सहित देश के दक्षिणी इलाके वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले रहे हैं। ऐसे में इस तरह के केंद्र अन्य क्षेत्रों में भी खोले जाएं।

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