By रेनू तिवारी | Jul 18, 2026
विश्व प्रसिद्ध पुरी रथयात्रा के दौरान एक अभूतपूर्व घटना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भगवान जगन्नाथ को उनके पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' पहनाए बिना ही मंदिर से बाहर रथ तक लाया गया। इस चूक को लेकर ओडिशा की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों—बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस—ने राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला है। यह विवादित घटना बृहस्पतिवार को उस समय हुई, जब भगवान जगन्नाथ को 12वीं सदी के ऐतिहासिक मंदिर से 'पहंडी' रस्म के तहत बाहर लाया जा रहा था। आमतौर पर इस रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा भव्य पुष्प मुकुट 'ताहिया' धारण करते हैं। हालांकि, इस बार भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों पर तो 'ताहिया' मौजूद था, लेकिन महाप्रभु जगन्नाथ का विग्रह बिना मुकुट के ही नजर आया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा, ‘‘इस बार भगवान के ‘ताहिया’ के बिना श्रद्धालुओं के सामने आने से लाखों भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।’’ बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने कहा कि राज्य सरकार को इस चूक के लिए करोड़ों जगन्नाथ भक्तों से माफी मांगनी चाहिए। पुरी का जगन्नाथ मंदिर ओडिशा सरकार के विधि विभाग के अधीन आता है।
वहीं, बीजद की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने सीधे राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुरी का जगन्नाथ मंदिर ओडिशा सरकार के विधि विभाग के अधीन आता है, इसलिए इस बड़ी चूक के लिए राज्य सरकार को करोड़ों जगन्नाथ भक्तों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इस पारंपरिक चूक ने न केवल भक्तों को निराश किया है, बल्कि राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है।