By Neha Mehta | Feb 09, 2026
बदनाम अपराधी जेफ्री एपस्टीन की काली परछाईं उसकी मौत के सालों बाद भी बड़े-बड़े दिग्गजों का पीछा नहीं छोड़ रही है। ताज़ा मामला नॉर्वे का है, जहाँ की मशहूर राजदूत (Ambassador) मोना जूल को एपस्टीन से रिश्तों के चलते अपना पद छोड़ना पड़ा है।
अमेरिका की तरफ से जारी की गई फाइलों में जब मोना जूल और एपस्टीन के बीच कनेक्शन की बात सामने आई, तो नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने उन पर एक्शन लिया। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने साफ कहा कि एपस्टीन जैसे अपराधी के साथ संपर्क रखना "सोच-समझ की भारी कमी" (Failure of judgement) को दर्शाता है। इस वजह से अब उन पर भरोसा करना मुश्किल है।
मोना जूल कोई मामूली डिप्लोमैट नहीं थीं। वो इजरायल, ब्रिटेन और UN में नॉर्वे की राजदूत रह चुकी हैं। सबसे बड़ी बात ये कि 90 के दशक में इजरायल-फिलिस्तीन के बीच हुए मशहूर 'ओस्लो समझौते' (Oslo Accords) में उनकी बहुत बड़ी भूमिका थी।
यह मामला सिर्फ नॉर्वे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे यूरोप में हड़कंप मचा हुआ है:
ब्रिटेन में भी हलचल: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ, मॉर्गन मैक्स्वीनी ने भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गलती मानी कि उन्होंने पीटर मेंडलसन को अमेरिका का राजदूत बनाने की सलाह दी, जबकि उनके भी एपस्टीन से रिश्ते जगजाहिर थे।
पति पर भी जांच: मोना जूल के पति तेर्जे रोड-लार्सन (जो खुद एक बड़े डिप्लोमैट हैं) भी एपस्टीन से संबंधों के लिए माफी मांग चुके हैं। अब सरकार उस थिंक टैंक (IPI) की फंडिंग की भी जांच कर रही है, जिसे वो चलाते थे।
राजकुमारी ने मांगी माफी: नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेट-मैरिट ने भी एपस्टीन से मिलने के लिए एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है।
फिलहाल अगर बात की जाए मोना जूल की तो इस सप्ताह की शुरुआत में नॉर्वे के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सरकार द्वारा जारी की गई फाइलों के एक विशाल संग्रह में एपस्टीन से जुड़े संबंधों की आंतरिक जांच लंबित रहने तक जूल को जॉर्डन और इराक में राजदूत के पद से निलंबित कर दिया था।