नागरिकता विधेयक के खिलाफ बंद से असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में जन-जीवन प्रभावित

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 08, 2019

गुवाहाटी। विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ आसू के 11 घंटे के बंद के दौरान असम में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को कई जगहों पर बंद कर दिया और वाहनों में तोड़फोड़ की। डिब्रूगढ़ में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के पैतृक स्थल पर उनके आवास का घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई। डिब्रूगढ़ में भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ का प्रयास करने पर ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के कार्यकर्ताओं और पुलिस में झड़प हो गयी जिसके बाद सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।

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पूर्वात्तर छात्र संगठन (एनईएसओ) द्वारा आहूत ‘पूर्वोत्तर बंद’ से ब्रह्मपुत्र घाटी में जनजीवन प्रभावित हुआ और बराक घाटी में आंशिक असर देखने को मिला। एनईएसओ क्षेत्र में छात्र संगठनों का प्रतिनिधि संगठन है। आसू भी इसका घटक है। इसी मुद्दे पर एनईएसओ द्वारा आहूत बंद का असम तथा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में 100 से ज्यादा संगठनों ने समर्थन किया। विधेयक के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने डिब्रूगढ़ में सोनोवाल के आवास का घेराव किया। उन्होंने नारे लगाए कि मुख्यमंत्री को पद पर रहने का कोई हक नहीं है क्योंकि वह राज्य के लोगों के हितों की रक्षा नहीं कर पाए।

पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया और कई स्थानों पर ट्रक, कार अन्य वाहनों के शीशे तोड़ दिए। रेलवे के सूत्रों ने बताया कि गुवाहाटी एवं डिब्रूगढ़ जिले में पटरियों को भी कुछ देर के लिए जाम किया गया हालांकि जीआरपी के प्रदर्शनकारियों को पटरियों पर से हटाने के बाद दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों की आवाजाही बहाल हो गई। केएमएसएस द्वारा आर्थिक नाकेबंदी के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मालवाहक ट्रकों की आवाजाही नहीं हो पायी। आसू और एनईएसओ के मुख्य सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा, ‘अगर मेघालय और मिजोरम विधेयक का विरोध करते हुए कैबिनेट प्रस्ताव ला सकता है तो असम ऐसा क्यों नहीं कर सकता?’

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आसू के अध्यक्ष दीपांकर नाथ ने कहा, ‘इसपर व्यापक विरोध के बावजूद केंद्र में भाजपा सरकार ने हमपर अलोकतांत्रिक तरीके से विधेयक थोपा है, क्योंकि वे अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के वोट के सहारे (लोकसभा) चुनाव जीतना चाहते हैं।’ राज्यों से मिली खबरों के मुताबिक, बंद से मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। कृषक मुक्ति संग्राम समिति के नेतृत्व में 70 संगठनों ने विधेयक के खिलाफ अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी की शुरूआत की। 

संगठनों ने कहा है कि तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, कोयला, वन उत्पाद तथा अन्य सामानों को राज्य से बाहर नहीं ले जाने लेंगे। केएमएसएस के सलाहकार अखिल गोगोई ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘विधेयक के खिलाफ आज से हमने अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी शुरू की है। हम राज्य से अपने संसाधनों को बाहर नहीं ले जाने देंगे।’ उन्होंने कहा कि 70 संगठनों के समर्थक राज्य भर में ऑयल इंडिया लिमिटेड और ओएनजीसी के कार्यालयों और केंद्रों के सामने प्रदर्शन करेंगे। संपर्क किये जाने पर ऑयल इंडिया के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि बंद से वह इस क्षेत्र को बाहर रखे।

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