By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 15, 2026
संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने बृहस्पतिवार को फैसला किया कि अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के वितरण में देरी के मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होने वाले छह राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया जाएगा। उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और बिहार के मुख्य सचिवों को एससी विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के वितरण में कई वर्षों की देरी के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित होना था। हालांकि, इनमें से कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, ‘‘यह हम सभी के लिए चौंकाने वाला था।’’ वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कोई समन्वय नहीं था और राज्यों ने भी इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने कहा, ‘‘तीन महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) नहीं दी गई है। यह एक गंभीर मुद्दा है।’’ पीएसी अध्यक्ष ने कहा कि समिति ने मुख्य सचिवों के उपस्थित नहीं होने को ‘‘गंभीरता से’’ लिया है और उनके खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार प्रस्ताव देने का सर्वसम्मति से फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि समिति इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने जा रही है। वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘अधिकारी किसी भी योजना के क्रियान्वयन में इतनी देरी नहीं कर सकते।’’ उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसलिए पीएसी इसे बड़े स्तर पर उठाएगी और हम अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करने जा रहे हैं। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए।
हमने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय सचिव के साथ इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।’’