By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 09, 2026
मुंबई, नौ सितंबर भारत में वरिष्ठ नेतृत्व का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और 94 प्रतिशत अधिकारी नए अवसर तलाशने के लिए तैयार हैं। इसका प्रमुख कारण करियर में तेजी से आगे बढ़ने की आकांक्षा है। माइकल पेज इंडिया का हिस्सा पेज एग्जीक्यूटिव इंडिया की ‘एग्जीक्यूटिव कंपनसेशन एंड टैलेंट ट्रेंड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वरिष्ठ नेतृत्व का परिदृश्य लगातार अधिक गतिशील हो रहा है।
वहीं, 41 प्रतिशत को उम्मीद नहीं है कि वे एक साल से अधिक समय तक अपनी मौजूदा भूमिका में बने रहेंगे। पेज एग्जीक्यूटिव इंडिया के प्रबंध साझेदार जॉन गोल्डस्टीन ने कहा, ‘‘भारत का कार्यकारी प्रतिभा बाजार कौशल की कमी से नहीं, बल्कि संगठनों द्वारा उसे विकसित करने और बनाए रखने की गति से प्रभावित है। आज वरिष्ठ अधिकारी तेजी से आगे बढ़ने, अधिक प्रभाव डालने तथा प्रदर्शन के बीच स्पष्ट तालमेल की तलाश कर रहे हैं।’’ रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन अब केवल कृत्रिम मेधा (एआई) को अपनाने से आगे बढ़कर इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि वरिष्ठ नेतृत्व एआई को कामकाज के मॉडल, निर्णय लेने की प्रक्रिया और दल के प्रदर्शन में किस तरह शामिल करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं में एआई तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है। 75 प्रतिशत अधिकारी अपने काम में इसका सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। इतनी ही संख्या में अधिकारियों ने उत्पादकता बढ़ने की बात कही जबकि 72 प्रतिशत ने काम की गुणवत्ता में सुधार देखा।
माइकल पेज के भारत और सिंगापुर के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक निलय खंडेलवाल ने कहा, ‘‘कार्यकारी स्तर पर एआई को लेकर चर्चा अब इसे अपनाने से आगे बढ़कर जवाबदेही पर आ गई है। जैसे-जैसे भूमिकाएं बदल रही हैं और नए कौशल महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं, एआई के साथ प्रभावी ढंग से काम कर सकने वाली प्रतिभा की पहचान, विकास और उसे बनाए रखने की क्षमता नेतृत्व की बढ़ती प्राथमिकता होगी।’’ वेतन के संबंध में 65 प्रतिशत अधिकारियों ने कहा कि वे अपने पारिश्रमिक से संतुष्ट हैं जबकि 87 प्रतिशत ने वेतन को नौकरी से संतुष्ट होने का प्रमुख कारण बताया। सर्वेक्षण में पाया गया कि नौकरी बदलने की प्रवृत्ति अब भी बहुत अधिक है और केवल वेतन के जरिये वरिष्ठ नेतृत्व को बनाए रखना पर्याप्त नहीं रह गया है।
वरिष्ठ अधिकारी अब करियर में प्रगति और पदोन्नति के अवसरों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में कौशल-आधारित नियुक्तियां जोर पकड़ रही हैं। संगठन प्रतिभा तक पहुंच बढ़ाने और पक्षपात कम करने में इसकी क्षमता को तेजी से पहचान रहे हैं, हालांकि इसका कार्यान्वयन अभी समान रूप से नहीं हो रहा है।