खैबर पख्तूनख्वा में Lashkar-e-Taiba को बसाने के लिए Tehreek-e-Taliban Pakistan का सफाया कर रही पाकिस्तानी सेना

By नीरज कुमार दुबे | Sep 30, 2025

पाकिस्तान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई लंबे समय से आतंकवाद को रणनीतिक साधन की तरह इस्तेमाल करती रही है। अफगानिस्तान से लेकर भारत तक, उसने ऐसे आतंकी संगठनों को समर्थन दिया जिनसे उसे भू-राजनीतिक लाभ मिल सके। अब ताज़ा घटनाक्रम बताता है कि पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में एक नया "क्लीन-अप ड्राइव" शुरू किया है, जिसका घोषित उद्देश्य है— तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का खात्मा। लेकिन इसके पीछे का वास्तविक मकसद है— लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए सुरक्षित ठिकाना तैयार करना।

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यहां सवाल यह भी उठता है कि क्या पाकिस्तान "अच्छे" और "बुरे" आतंकवाद के बीच चयन कर रहा है? देखा जाये तो यह घटनाक्रम पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही नीति को उजागर करता है। पाकिस्तान की नजर में अच्छा आतंकवाद वह है जिसे इस्लामाबाद भारत या अफगानिस्तान में इस्तेमाल कर सके और जो ISI के हितों के अनुरूप काम करे। जैसे लश्कर-ए-तैयबा या हिज्बुल मुजाहिदीन। साथ ही इस्लामाबाद की नजर में बुरा आतंकवाद वह है जो पाकिस्तान के ही खिलाफ़ खड़ा हो जाए और उसकी नीतियों को चुनौती दे। जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान। हम आपको यह भी बता दें कि क्लीन-अप ड्राइव में दर्जनों नागरिकों की मौत इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान का असली लक्ष्य "आतंकवाद मुक्त" क्षेत्र बनाना नहीं, बल्कि अपने पाले हुए संगठनों के लिए रास्ता साफ़ करना है।

अब सवाल उठता है कि पाकिस्तान की इस कार्रवाई से अगर TTP भड़क गया तब क्या होगा? देखा जाये तो पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा ख़तरा यही है कि अगर TTP पूरी ताक़त से पलटवार करता है, तो KPK और संघीय इलाक़ों में हिंसा बेकाबू हो सकती है। TTP पहले ही सेना, पुलिस और प्रशासनिक ठिकानों पर हमले करता रहा है। यदि उसे यह अहसास हुआ कि सेना लश्कर के लिए जगह बनाने के लिए उसका सफाया कर रही है, तो वह और उग्र हो सकता है। इससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित होगी। साथ ही पाकिस्तानी सेना को एक साथ दो मोर्चों— भीतरी विद्रोह और आतंकी अभियानों पर लड़ना पड़ेगा। इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि और कमजोर होगी, क्योंकि यह साफ़ हो जाएगा कि उसका असली उद्देश्य आतंकवाद खत्म करना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा आतंकियों को बचाना और बढ़ावा देना है।

हम आपको यह भी बता दें कि कश्मीर में भारत की कठोर आतंक-रोधी कार्रवाइयों और FATF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दबाव ने लश्कर की गतिविधियों को सीमित कर दिया है। पाकिस्तान जानता है कि यदि लश्कर को जीवित रखना है, तो उसे नए प्रशिक्षण केंद्र और सुरक्षित ठिकाने चाहिए। KPK का इलाका इसके लिए मुफीद माना जा रहा है क्योंकि भूगोल दुर्गम है, जिससे बाहरी नज़र रखना मुश्किल होता है। साथ ही तालिबान की मौजूदगी से चरमपंथी माहौल पहले से तैयार है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की पकड़ वहाँ मजबूत है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निगरानी को छकाया जा सके।

देखा जाये तो पाकिस्तान की ताज़ा रणनीति यह दिखाती है कि वह आज भी आतंकवाद को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा नीति का अभिन्न हिस्सा मानता है। TTP का खात्मा केवल इसलिए किया जा रहा है ताकि लश्कर और हिज्बुल जैसे संगठन भारत-विरोधी अभियानों के लिए मजबूत हो सकें।

बहरहाल, यह "अच्छे" और "बुरे" आतंकवाद का खतरनाक खेल है, जो न सिर्फ पाकिस्तान की आंतरिक शांति को निगल जाएगा, बल्कि दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती बनेगा। यदि TTP ने बदले की कार्रवाई तेज़ की, तो पाकिस्तान के लिए यह नीति आत्मघाती साबित होगी।

-नीरज कुमार दुबे

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