By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 31, 2019
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार कोआरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारें पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर ‘‘अन्याय और अत्याचार’’पर जवाब देने में विफल रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब इन लोगों को राहत दे रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि यहां तक कि प्रधानमंत्री के तौर पर जवाहरलाल नेहरू ने भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू शरणार्थियों की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त की थी। पूर्वी पाकिस्तान अब बांग्लादेश है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्व सरकारों के सामने समय समय पर पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाली नाइंसाफी और अत्याचार का विषय आया, लेकिन उनमें जवाब देने का साहस नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इस मुद्दे पर निर्णायक पहल करने का साहस, दृढ़ विश्वास और क्षमता है।
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सिंह ने कहा कि नेहरू ने हिन्दुओं के लिए ‘शरणार्थी’ शब्द और मुस्लिमों के ‘प्रवासी’ शब्द को इस्तेमाल किया। उन्होंने इस्लामी राज्य पाकिस्तानपर विचार किया जहां हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, इसलिए वे शरण चाह रहे हैं।मंत्री ने कहा कि नेहरू-लियाकत समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ महीनों के भीतर, नेहरू को एहसास हो गया था कि पाकिस्तान अपने अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर खरा नहीं उतर रहा है। उन्होंने कहा कि यह नेहरू द्वारा 5 नवंबर, 1950 को संसद में दिए गए बयान से स्पष्ट है, जब उन्होंने कहा था कि ‘इसमेंनिश्चित रूप से कोई संदेह नहीं है कि जो विस्थापित लोग भारत में बसने आए हैं, उनके पास नागरिकता होनी चाहिए है। यदि इस संबंध में कानून अपर्याप्त हैं, तो कानून को बदला जाना चाहिए। सिंह ने कहा कि 1963 में लोकसभा में एक ध्यान आकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेहरू ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया था कि पूर्वी पाकिस्तान में अधिकारी हिंदुओं पर बहुत दबाव बना रहे हैं। कांग्रेस पर एनपीआर और एनआरसी को मिलाने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने 2010 में संसद में एक लघु चर्चा के दौरान कहा था कि एनपीआर एनआरसी का आधार हो सकता है।