एक का कर्ज चुकाने के लिए दूसरे से लोन लेता है Pakistan, UAE का उधार चुकाने के लिए Saudi Arabia से ले लिये तीन अरब डॉलर

By नीरज कुमार दुबे | Apr 16, 2026

पूरी दुनिया में आतंकिस्तान के नाम से जाना जाने वाला पाकिस्तान अब इस हालत में पहुंच चुका है कि एक देश का कर्ज चुकाने के लिए दूसरे देश से कर्ज लेना उसकी मजबूरी बन गई है। इसके चलते वह दुनिया भर में मजाक का विषय बनता जा रहा है। व्यंग्यकारों का तो यहां तक कहना है कि किसी देश की आर्थिक हालत पर यदि व्यंग्य लिखना हो तो शायद पाकिस्तान से बेहतर उदाहरण आज दुनिया में मिलना मुश्किल है। 

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हम आपको बता दें कि पाकिस्तान को जल्द ही संयुक्त अरब अमीरात का अरबों डॉलर का कर्ज चुकाना है। ऐसे में सऊदी अरब की यह सहायता उसके लिए राहत की सांस जैसी है। लेकिन यह राहत स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि एक अस्थायी सहारा है, जिससे पाकिस्तान थोड़े समय के लिए अपने आर्थिक संकट को टाल सकेगा। पाकिस्तान सरकार का दावा है कि इस मदद से उसके विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होंगे और वह वित्त वर्ष के अंत तक लगभग 18 अरब डॉलर का भंडार जुटाने का लक्ष्य रखता है, जो करीब तीन महीने के आयात बिल के बराबर होगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपने सभी बाहरी दायित्व समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और हाल ही में एक अरब चालीस करोड़ डॉलर के यूरो बांड का भुगतान बिना किसी परेशानी के कर दिया गया।

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। यदि कोई पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय का एक्स अकाउंट देखे तो साफ नजर आता है कि वहां के मंत्री और अधिकारी दुनिया भर में घूम घूमकर कर्ज और आर्थिक मदद जुटाने में लगे हुए हैं। कभी सऊदी अरब, कभी चीन, कभी अंतरराष्ट्रीय संस्थान, तो कभी अन्य खाड़ी देश, हर जगह पाकिस्तान की झोली फैली हुई नजर आती है। यह स्थिति किसी मजबूत अर्थव्यवस्था की नहीं, बल्कि गहरे संकट में फंसे देश की पहचान होती है।

हम आपको यह भी बता दें कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंध भी इस आर्थिक सहायता के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण हैं। दोनों देशों ने हाल के दिनों में आपसी सहयोग को मजबूत किया है, जिसमें रक्षा समझौता भी शामिल है। पाकिस्तान ने आर्थिक मदद के लिए सऊदी नेतृत्व, विशेष रूप से मोहम्मद बिन सलमान के प्रति आभार जताया है और इसे दोनों देशों के बीच गहरे तालमेल का परिणाम बताया है।

देखा जाये तो आज पाकिस्तान की आम जनता के समक्ष सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक उनका देश इस तरह एक से कर्ज लेकर दूसरे का कर्ज चुकाता रहेगा। यह चक्र कब टूटेगा, इसका जवाब पाकिस्तान के आला अधिकारियों के पास शायद नहीं है। देखा जाये तो बार बार उधार लेकर अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश एक ऐसे मरीज की तरह है जिसे बार बार दर्द निवारक दवा दी जा रही हो, लेकिन बीमारी का इलाज नहीं किया जा रहा हो।

बहरहाल, सऊदी अरब की यह नई सहायता पाकिस्तान को थोड़ी राहत जरूर देगी, लेकिन यह उसकी मूल समस्याओं का समाधान नहीं है। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की राह नहीं छोड़ेगा और सेना की बजाय वहां की सरकार देश को नहीं चलाएगी तब तक वह इसी तरह कर्ज के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था को घसीटता रहेगा और दुनिया में अपनी छवि सुधारने की बजाय और अधिक हास्य का पात्र बनता जाएगा।

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