By नीरज कुमार दुबे | Aug 27, 2026
मई 2025 में भारत के साथ सैन्य टकराव के दौरान ईरान से “मजबूत समर्थन” मिलने के पाकिस्तान के दावे ने नई कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने नेशनल असेंबली में लिखित जवाब में दावा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे के समर्थन में इस्लामाबाद ने न तो किसी सैन्य सहायता का ब्योरा दिया है और न ही किसी ठोस राजनयिक या खुफिया सहयोग का।
दिलचस्प बात यह है कि मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान ईरान का सार्वजनिक रुख तनाव कम करने और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील का था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उस समय भारत और पाकिस्तान दोनों का दौरा किया था और साफ कहा था कि तेहरान के दोनों देशों के साथ मित्रवत संबंध हैं।
ऐसे में डार का दावा सवालों के घेरे में है। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि उसके प्रधानमंत्री की मई 2025 में ईरान यात्रा का एक उद्देश्य भारत के खिलाफ युद्ध के दौरान मिले ईरानी समर्थन के लिए वहां के नेतृत्व को धन्यवाद देना था। लेकिन पाकिस्तान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह “मजबूत समर्थन” आखिर किस रूप में था।
नई दिल्ली में इस दावे को पाकिस्तान की अपनी कूटनीतिक कहानी मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। भारत पहले ही यह कह चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला और पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ा।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ईरान ने पाकिस्तान का कितना साथ दिया, बल्कि यह भी है कि तेहरान की ओर से ऐसा कोई दावा क्यों नहीं आया? यदि समर्थन इतना “मजबूत” था, तो उसकी पुष्टि ईरान क्यों नहीं करता?
बहरहाल, पाकिस्तान के दावे और ईरान के उस समय के सार्वजनिक रुख के बीच यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना रहा है।