By अभिनय आकाश | Sep 17, 2025
अमेरिका के टैरिफ के जवाब में एक तरफ भारत से दोस्ती तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ अपने संबधों की नुमाइश करता चीन बता रहा है कि इस समय उसकी प्राथमिकता सिर्फ पाकिस्तान पर टिकी हुई है। ये पूरी दुनिया जानती है कि टैरिफ के बीच भारत को सिर्फ और सिर्फ चीन मैनेज करने की कोशिश कर रहा है। भारत भी यही कर रहा है। भारत भी चीन को मैनेज कर रहा है। दोस्ती तक पहुंचना बहुत मुश्किल है। वो भी तब जब कुछ अलग तरह की तस्वीरें सामने आ रही हो। मई के महीने में हर मोर्चे पर भारत से मुंहतोड़ जवाब पाने के बाद पाकिस्तान अपने रक्षा उपकरणों को तेजी के साथ अपग्रेड करने, एडवांस करने और ज्यादा करने में जुट चुका है।
ऑपरेशन सिंदूर में तो कैसे चीनी हथियार कबाड़ साबित हुए इसकी कई तस्वीर भी दुनिया के सामने आई। लेकिन ये भरोसा है कि टूट नहीं रहा। पाकिस्तान अब भी चीन से नए हथियारों को खरीदने की इच्छा रख रहा है। तभी तो पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी चीन के दौरे पर पहुंचे। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को चीन में एक गुप्त सैन्य परिसर का दौरा कराया गया जहां उन्होंने संयुक्त रक्षा उत्पादन बढ़ाने की बात कही। जरदारी इस विशाल परिसर का दौरा करने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष हैं। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभालने वाले जरदारी ने ‘एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना’ (एवीआईसी) का दौरा किया जहां उन्हें सबसे उन्नत सैन्य उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई और इसमें विशेष रूप से नए लड़ाकू विमान भी शामिल थे।
जरदारी के कार्यालय ने इस्लामाबाद में एक बयान में कहा कि उन्हें एवीआईसी की उन्नत क्षमताओं के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें जे-10 लड़ाकू विमान, पाकिस्तान के साथ मिलकर बनाए जाने वाले जेएफ-17 थंडर समेत जे-20 विमान में प्रगति आदि शामिल है। चीन की 10 दिवसीय यात्रा पर आए जरदारी को आधुनिक बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए मानव रहित हवाई वाहनों, पूर्ण स्वचालित इकाइयों और एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों के बारे में भी जानकारी दी गई। चीन के विदेश मंत्रालय ने जरदारी के एवीआईसी दौरे और रक्षा उत्पादन पर चीन के साथ मजबूत सहयोग की उनकी बात को सोमवार को अधिक महत्व नहीं दिया। इसके बजाय मंत्रालय ने वैश्विक सुरक्षा सहयोग (जीएसआई) के प्रति अपने समर्थन की बात कही, जो एक चीनी सुरक्षा संरचना है और उसे अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व के प्रतिकार के रूप में प्रस्तुत किया गया है