बीएनपी व जमात की मदद कर पाकिस्तान ‘‘गड़बड़ी’’ में शामिल : बांग्लादेश के सूचना मंत्री

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 28, 2023

बांग्लादेश के सूचना मंत्री हसन महमूद ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान देश में धार्मिक कट्टरता और अस्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी की मदद कर ‘‘गड़बड़ी’’ पैदा कर रहा है। उन्होंने अवामी लीग सरकार के कार्यकाल में भारत के साथ बने प्रगाढ़ संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब कभी विपक्षी पार्टी बीएनपी सत्ता में आती है तो इस पड़ोसी देश के साथ संबंध प्रभावित होते हैं और अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। महमूद ने पीटीआई-के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि पाकिस्तान बीएनपी और जमात को मदद मुहैया करा रहा है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान जमात और बीएनपी की मदद कर रहा है। उन्होंने (दोनों दलों ने) पिछले चुनावों में उस देश से पैसे लिए।

उन्होंने कहा, ‘‘... अगर अवामी लीग सत्ता में नहीं है, तो फिर से वही होगा। इसका असर भारत पर भी होगा। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या अवामी लीग के बांग्लादेश की सत्ता में नहीं रहने पर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध प्रभावित होंगे, तो उन्होंने जोर दिया, निश्चित रूप से, ऐसा (संबंधों पर प्रभाव पड़ेगा) होगा। ’’ महमूद ने दावा किया कि बीएनपी की राजनीति भारत और हिंदू धर्म विरोध’’ पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, दूसरी ओर, चूंकि अवामी लीग एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और यह देश में राजनीतिक स्थिरता और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देती है। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों के संबंध में महमूद ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंधों की तुलना किसी अन्य रिश्ते से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध समय पर खरे उतरे हैं और ये द्विपक्षीय ‘‘खून से जुड़े’’ हुए हैं। महमूद ने कहा, हमारी विदेश नीति सभी के साथ मित्रता और किसी के प्रति द्वेष नहीं रखने की है।

इसलिए हमारे सभी देशों - अमेरिका, चीन और यूरोपीय देशों के साथ संबंध हैं। लेकिन भारत के साथ संबंध अलग हैं; इसकी तुलना किसी अन्य देश से नहीं की जा सकती। महमूद ने कहा, बांग्लादेश और भारत के बीच के संबंध खून से जुड़े हैं। जब बांग्लादेश के लोगों ने देश की मुक्ति के लिए लड़ाई लड़ी, तो भारतीय सैनिकों ने भी हमारे लिए लड़ाई लड़ी और अपनी कुर्बानी दी। किसी भी अन्य देश के साथ संबंध भारत के संबंध में बाधा नहीं बनेंगे। तीस्ता नदी जल बंटवारा संधि के बारे में उन्होंने कहा कि भारत सरकार की मंशा बहुत सकारात्मक है। उन्होंने कहा, हम देखते हैं कि भारत सरकार समाधान खोजने के लिए प्रयासरत है, लेकिन आपके यहां आंतरिक मुद्दे हैं, और भारतीय संविधान के अनुसार, राज्य सरकार की सहमति आवश्यक है। लेकिन हम देखते हैं कि भारत सरकार की मंशा बहुत सकारात्मक है।

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