Terrorism के समर्थन में खुल कर सामने आया Pakistan, पाक अफसरों ने लश्कर कमांडर की कब्र पर दी सलामी

By नीरज कुमार दुबे | Aug 16, 2025

14 अगस्त 2025 को पाकिस्तान ने अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया। लेकिन इस मौके पर जो दृश्य सामने आया, उसने एक बार फिर इस्लामाबाद की आतंकवाद पर दोहरे रवैये को उजागर कर दिया। हम आपको बता दें कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़े एक आतंकवादी की कब्र पर पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित करना न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना अब भी इन संगठनों को "राज्य संरक्षण" प्रदान कर रही है।

मुदस्सिर का अंतिम संस्कार 7 मई को मुरिदके में किया गया था। हैरान करने वाली बात यह रही कि उसकी नमाज़-ए-जनाज़ा लश्कर कमांडर अब्दुर रऊफ (अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधित आतंकी, जिसे अमेरिका ने ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया है) ने पढ़ाई। इस मौके पर पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी और पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल भी मौजूद थे। यह सब दर्शाता है कि पाकिस्तानी राज्यसत्ता आतंकवादियों को न केवल सहानुभूति, बल्कि सम्मान भी देती है।

देखा जाये तो एक ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है और आतंक के खिलाफ लड़ने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर उसके जनरल और मंत्री ऐसे आतंकवादियों की कब्र पर फूल चढ़ा रहे हैं जिन्हें UN और US दोनों ने आतंकवादी घोषित कर रखा है। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान के नेताओं ने आतंकियों के ताबूतों पर फूल बरसाए हैं। कुछ मौकों पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर तक दिया गया है और अब राष्ट्रीय पर्वों पर उनकी कब्रों पर सलामी दी जा रही है। यह सब इस बात को प्रमाणित करता है कि पाकिस्तान में आतंकवाद राज्य की नीति का एक उपकरण बन गया है।

देखा जाये तो इस तरह की घटनाएँ न केवल दक्षिण एशिया में शांति प्रक्रिया को बाधित करती हैं, बल्कि भारत के लिए सुरक्षा चिंताओं को भी बढ़ा देती हैं। भारत को बार-बार यह साबित करने की ज़रूरत नहीं कि पाकिस्तान एक ‘टेररिस्तान’ बन चुका है— पाकिस्तान के अपने कार्यकलाप इसकी पुष्टि करते रहते हैं। अब समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई के लिए जवाबदेह ठहराएं। केवल वित्तीय प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं — जब तक कि पाकिस्तान की राज्य संरचना में मौजूद आतंकवाद के समर्थकों को दंडित नहीं किया जाता, तब तक वैश्विक आतंकवाद को जड़ से खत्म करना असंभव होगा।

बहरहाल, मुदस्सिर अहमद और अन्य आतंकवादियों को पाकिस्तान द्वारा दी गई सरकारी श्रद्धांजलि इस बात की गवाही है कि आतंकवाद वहां केवल एक संगठित अपराध नहीं, बल्कि राजनीतिक व रणनीतिक उपकरण बन चुका है। स्वतंत्रता दिवस के दिन इस प्रकार के आयोजनों का होना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान अभी भी ‘गुलामी’ में है— परंतु यह गुलामी आतंकवाद की विचारधारा की है। यह घटनाक्रम भारत सहित पूरे विश्व के लिए एक स्पष्ट संदेश है: पाकिस्तान का आतंकवाद के प्रति रुख कोई 'गफलत' नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति है — जिसे अब रोकने की जिम्मेदारी पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की है।

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