US-Iran की मध्यस्थता पाकिस्तान को पड़ी भारी, Islamabad में Lockdown जैसे हालात, अवाम में गुस्सा

By अभिनय आकाश | Apr 24, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में शांतिदूत की भूमिका निभाने की पाकिस्तान की चाहत का एक अनचाहा नतीजा सामने आया है। राजधानी इस्लामाबाद के साथ-साथ देश के सैन्य तंत्र का केंद्र माने जाने वाले रावलपिंडी को भी एक तरह से पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरी ओर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का भविष्य अभी भी अधर में लटका हुआ है। यह स्थिति कोविड-काल के लॉकडाउन की यादें ताज़ा कर रही है और कारोबार व आमदनी के नुकसान के चलते लोगों के गुस्से को और भड़का रही है। ब्रिटेन के न्यूज़ आउटलेट द गार्डियन ने बताया कि पाकिस्तानी राजधानी की सड़कें कई दिनों से खाली पड़ी हैं। सड़कों पर सिर्फ़ सेना और पुलिस की वर्दी पहने लोग ही नज़र आ रहे हैं। रिपोर्ट में शहर भर में बंद दुकानों, ठप पड़े पब्लिक ट्रांसपोर्ट और 'वर्क-फ़्रॉम-होम' के आदेशों का ज़िक्र किया गया है। कई लोगों को ऐसा लग रहा है, जैसे वे फिर से महामारी के दौर में लौट आए हों। फ़र्क बस इतना है कि "इस बार वजह कोई वायरस नहीं है," बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित बातचीत है, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

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लॉकडाउन का सबसे ज़्यादा बुरा असर दोनों शहरों के मज़दूर वर्ग पर पड़ा है। 'द गार्डियन' ने बताया, "इस्लामाबाद और पास के रावलपिंडी में कई मज़दूर, जो फ़्लैट का किराया नहीं दे पा रहे थे, उन्हें शनिवार को एक सरकारी आदेश के बाद, बिना किसी सूचना के उनके हॉस्टल से निकाल दिया गया; और हज़ारों लोगों को जल्दबाज़ी में रहने के लिए कोई जगह ढूँढ़नी पड़ी। जैसे-जैसे वे बातचीत बार-बार नाकाम होती गई, गुस्सा और गहराता गया। एक हेल्थ ऑफिसर, अरीज अख्तर ने 'द गार्डियन' को बताया, "ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिंजरे में रह रहे हैं

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