'जैसे को तैसा', पाकिस्तान ने बैरिकेड्स हटाए तो दिल्ली में चला बुलडोजर, पाक हाई कमीशन का सुरक्षा घेरा ध्वस्त!

By रेनू तिवारी | Aug 20, 2026

नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन (High Commission of Pakistan) के बाहर भारतीय अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाहरी सुरक्षा घेरे को हटा दिया है। इस कार्रवाई के तहत डिप्लोमैटिक कंपाउंड के चारों तरफ लगाए गए ट्रैफिक बॉलार्ड्स (Traffic Bollards) और कंक्रीट के बैरिकेड्स को बुलडोजर और क्रेन की मदद से पूरी तरह हटा दिया गया। यह कदम इस्लामाबाद में स्थित भारतीय हाई कमीशन के बाहर पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा सुरक्षा बैरिकेड्स हटाए जाने के ठीक तीन दिन बाद उठाया गया है। इसे दोनों पड़ोसी देशों के बीच एक स्पष्ट जवाबी कार्रवाई (Tit-for-Tat action) के रूप में देखा जा रहा है।

संयोग से, ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुए हैं जब भारत में US राजदूत सर्जियो गोर की जम्मू-कश्मीर की पहली यात्रा और उनके द्वारा इस केंद्र शासित प्रदेश को "भारत का अहम हिस्सा" बताए जाने से पाकिस्तान काफी परेशान दिख रहा है।

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बुधवार को श्रीनगर की अपनी यात्रा के दौरान, गोर ने जम्मू-कश्मीर को "भारत का अहम हिस्सा" बताया और इलाके की प्राकृतिक सुंदरता की तारीफ की। उनकी इस टिप्पणी पर इस्लामाबाद की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई।

गोर, जो ट्रंप प्रशासन में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत भी हैं, ने श्रीनगर का दौरा किया और डल झील में शिकारा की सवारी की। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा बेहतर करने के लिए उठाए गए कदमों को देखते हुए, अमेरिका जम्मू-कश्मीर के लिए अपनी ट्रैवल एडवाइज़री पर फिर से विचार कर सकता है।

पाकिस्तान ने US डिप्लोमैट को तलब किया

गोर की टिप्पणी के कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में US की चार्ज डी अफेयर्स नताली बेकर को तलब किया और राजदूत की टिप्पणियों पर "कड़ा विरोध" दर्ज कराया।

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामाबाद ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने की "कड़ी निंदा की और इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया"। उसने कहा कि जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक विवादित क्षेत्र है, जिसकी अंतिम स्थिति का निर्धारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार किया जाना बाकी है।

पाकिस्तानी पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि गोर की टिप्पणियां कश्मीर विवाद पर अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे रुख के विपरीत थीं और अंतरराष्ट्रीय कानून और UN चार्टर के प्रति वाशिंगटन की घोषित प्रतिबद्धता के अनुरूप नहीं थीं।

पाकिस्तान ने ट्रंप के मध्यस्थता वाले दावे का ज़िक्र किया

इस्लामाबाद ने पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन तक चले टकराव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश का भी ज़िक्र किया। ट्रंप की पेशकश को मानते हुए, पाकिस्तान ने वॉशिंगटन से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसके सार्वजनिक बयान जम्मू-कश्मीर की विवादित स्थिति पर उसके रुख के अनुरूप हों।

राजनयिक परिसरों और अमेरिकी राजदूत की कश्मीर संबंधी टिप्पणियों से जुड़े ये घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए एक संवेदनशील समय पर सामने आए हैं, क्योंकि दोनों पक्ष उन कदमों पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं जिनसे उनके राजनयिक या रणनीतिक हितों पर असर पड़ने की आशंका है।

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