Pakistan ने ट्रंप से मिलने के लिए खर्च किए 45 करोड़, आखिर खुल गया युद्ध विराम का राज

By अभिनय आकाश | Jan 08, 2026

भारत और पाकिस्तान के बीच एक संघर्ष देखने को मिला, जिसमें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, और पाकिस्तान के स्थित आतंकवादी ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। जिसके बाद से साथियों दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम होता है और संघर्ष विराम की जो घोषणा है वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा की जाती है। जैसे उनकी घोषणा की जाती है उसके बाद काफी चर्चाएं इस बात को लेकर के शुरू हो जाती हैं कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच जो युद्ध विराम हुआ है वो अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा करवाया गया है। हालांकि भारत इसको पूरे सिरे से खारिज कर देता है और भारत का कहना यह है कि इस अह सीज फायर में दोनों देशों के बीच जो सीज युद्ध विराम हुआ है इसमें किसी भी तीसरे देश की मध्यस्था स्वीकार नहीं की गई है।

पाकिस्तान इस बात से सहमत हो जाता है और डोनाल्ड ट्रंप को पीस प्रेसिडेंट के नाम से पुकारने लगता है। इसके अलावा नोबेल पुरस्कार की शांति का जो नोबेल पुरस्कार है 2025 में घोषणा की जानी थी उसके लिए जो उम्मीदवारी उन्होंने पेश की थी उसका वह समर्थन भी कर देता है। यानी कि पाकिस्तान पूरी तरह से मानता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो सीज फायर हुआ है उसको डोनाल्ड ट्रंप ने करवाया है। हालांकि तब उस समय खुलकर के बातें निकल के नहीं आई थी लेकिनअभी एक रिपोर्ट जारी की गई है अमेरिका के द्वारा जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इतना ज्यादा डर गया था कि किस प्रकार से उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से तत्काल में मीटिंग करने के लिए तत्काल में बैठक करने के लिए ₹45 करोड़ खर्च कर दिए और इसके अलावा वहां के अधिकारियों से चाहे वह विदेश मंत्री हो या फिर इसके अलावा वाइस प्रेसिडेंट हो, डोनाल्ड ट्रंप हो, उनसे मिलने के लिए उन्होंने लगभग 60 बार से भी ज़्यादा संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया था।

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कूटनीतिक प्रयासों में तेजी

एक अलग दस्तावेज़ से पता चला है कि इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अमेरिका में पैरवी और सार्वजनिक नीति प्रचार पर 9 लाख डॉलर खर्च किए। यह संस्थान पाकिस्तान स्थित एक थिंक टैंक है जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग से संबद्ध है। खुलासे के अनुसार, हाइपरफोकल कम्युनिकेशंस एलएलसी को अक्टूबर 2024 में टीम ईगल कंसल्टिंग एलएलसी के उप-ठेकेदार के रूप में इस कार्य को करने के लिए पंजीकृत किया गया था। एफएआरए दस्तावेज़ में कहा गया है कि इस गतिविधि में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अमेरिकी सरकार से संपर्क करना शामिल था। एक अन्य दस्तावेज़ से पता चलता है कि वाशिंगटन स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने 1 अक्टूबर, 2025 से प्रभावी एर्विन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप एलएलसी के साथ एक अनुबंध किया है। समझौते में प्रारंभिक तीन महीने की अवधि के लिए 25,000 डॉलर के मासिक भुगतान का प्रावधान है। दस्तावेज़ में कांग्रेस सदस्यों और कार्यकारी शाखा के अधिकारियों से संपर्क करने को नियोजित गतिविधियों में शामिल किया गया है। कार्यक्षेत्र में नीति समूहों और थिंक टैंकों के साथ जुड़ाव भी शामिल है। इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और लोकतांत्रिक सुधार जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। इस याचिका में व्यापार संवर्धन, पर्यटन और दुर्लभ खनिजों के लिए पाकिस्तान की क्षमता का भी उल्लेख किया गया है।

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पाकिस्तान का बढ़ता कर्ज

पाकिस्तान वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम के तहत है, जो उसका 24वां कार्यक्रम है। इससे पहले 3 अरब डॉलर के एक अल्पकालिक समझौते ने उसे 2023 में संप्रभु दिवालियापन से बचने में मदद की थी। एफएआरए के खुलासे से वाशिंगटन में पाकिस्तान के व्यापक पैरवी प्रयासों का पर्दाफाश होता है, जिससे पता चलता है कि भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निर्णायक रूप से निशाना बनाए जाने के बावजूद, पाकिस्तान ने खुद को अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेही से बचाने की कोशिश की। ये दस्तावेज भारत की रणनीतिक सटीकता और क्षेत्रीय प्रभुत्व की बढ़ती मान्यता को रेखांकित करते हैं

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